वार डेस्क|BDC News|bhopalonline.org
युद्ध की शुरुआत और ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’
28 फरवरी के दिन अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किया। इजरायल ने इसे ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने इसे ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ (Operation Epic Fury) नाम दिया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे ईरान के शासन को बदलने और उसके परमाणु कार्यक्रम को हमेशा के लिए समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। युद्ध के पहले ही दिन ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के तेहरान स्थित आवास पर मिसाइल हमला किया गया, जिसमें उनकी मौत की पुष्टि हो चुकी है।
्पररमाणु ठिकानों और राजधानी तेहरान पर बमबारी
आज यानी दो मार्च सोमवार को युद्ध का सबसे खतरनाक मोड़ तब आया जब ईरान के राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र में दावा किया कि अमेरिकी और इजरायली विमानों ने ईरान के नतंज (Natanz) परमाणु संवर्धन केंद्र को निशाना बनाया है। हालांकि अमेरिका और इजरायल ने आधिकारिक तौर पर परमाणु ठिकानों पर सीधे हमले की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उन्होंने ‘नेतृत्व और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे’ को तबाह करने की बात स्वीकार की है।
रात भर सुनाई दी धमाकों की आवाज
तेहरान और पास के शहर करज (Karaj) में आज रात भर धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इजरायली वायुसेना ने तेहरान के हृदय क्षेत्र में स्थित ‘ईरानी शासन’ के प्रमुख केंद्रों और सरकारी टेलीविजन मुख्यालय पर भारी बमबारी की है। ईरानी रेड क्रेसेंट के अनुसार, अब तक देश भर में 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हैं। दक्षिण ईरान में एक स्कूल पर हुए हमले में 85 बच्चों के मारे जाने की भी दुखद खबर आ रही है।
ईरान का पलटवार और क्षेत्रीय देशों पर असर
ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता की मौत और देश पर हुए हमलों का बदला लेने के लिए इजरायल और उसके सहयोगी खाड़ी देशों पर मिसाइलों और ड्रोनों की झड़ी लगा दी है। ईरान की ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ ने दावा किया है कि उन्होंने खाड़ी में तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ पर चार बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। हालांकि, पेंटागन ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि मिसाइलें निशाने के करीब भी नहीं पहुँचीं।
आज की एक और बड़ी घटना कुवैत से जुड़ी है। कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उसके क्षेत्र में कई अमेरिकी लड़ाकू विमान (F-15) दुर्घटनाग्रस्त हुए हैं। हालांकि सभी पायलट सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे। कुवैत में अमेरिकी दूतावास के पास भी धुएं का गुबार देखा गया है, जो संभावित ईरानी ड्रोन हमले का परिणाम माना जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन और जॉर्डन ने भी ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को अपने आसमान में इंटरसेप्ट (intercept) करने की पुष्टि की है। सऊदी अरब की रास तनुरा तेल रिफाइनरी (दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक) को भी आज ड्रोन से निशाना बनाया गया, जिसके बाद एहतियात के तौर पर इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
लेबनान और हिजबुल्लाह का युद्ध में प्रवेश
2 मार्च की सुबह यह युद्ध ईरान की सीमाओं से बाहर निकलकर लेबनान तक फैल गया। ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह ने अली खामेनेई की हत्या के विरोध में उत्तरी इजरायल और हाइफ़ा शहर के पास एक मिसाइल डिफेंस साइट पर रॉकेट और ड्रोन से हमला किया। इसके जवाब में इजरायल ने दक्षिणी लेबनान और राजधानी बेरूत के उपनगरों में भीषण हवाई हमले किए। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में आज कम से कम 31 लोगों की मौत हुई है और 149 लोग घायल हुए हैं। लेबनान सरकार ने इसे लेकर आपातकालीन बैठक बुलाई है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और मानवीय प्रभाव
इस युद्ध ने वैश्विक बाजारों में हाहाकार मचा दिया है। कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं क्योंकि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों और व्यापारिक मार्गों को निशाना बनाने की धमकी दी है। खाड़ी देशों—कुवैत, अबू धाबी, दुबई और दोहा—के हवाई अड्डों पर सैकड़ों उड़ानें रद्द कर दी गई हैं।
ईरान और इजरायल दोनों देशों में स्कूल, बैंक और गैर-जरूरी सरकारी दफ्तर बंद कर दिए गए हैं। तेहरान जैसे बड़े शहरों से लाखों लोग सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर रहे हैं। तुर्की ने सुरक्षा कारणों से ईरान के साथ अपनी सीमा पर यात्रियों की आवाजाही को निलंबित कर दिया है। पाकिस्तान के कराची में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर हुए हिंसक प्रदर्शनों में भी 6 लोगों की मौत की खबर है।
आगे क्या होगा…
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया है कि यह सैन्य अभियान “चार सप्ताह या उससे कम” समय तक चल सकता है, लेकिन जमीनी हकीकत बताती है कि युद्ध लंबे समय तक खिंच सकता है। रूस और चीन ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। व्लादिमीर पुतिन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया है। ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के प्रमुख ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान वर्तमान स्थिति में अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेगा।
दुनिया अब तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है। अगर यह संघर्ष आने वाले दिनों में और तेज होता है, तो तेल आपूर्ति ठप होने से वैश्विक मंदी का खतरा और भी गहरा हो जाएगा।
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