अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध… शुरू से अभी तक
अंतरराष्ट्रीय डेस्क। BDC News| bhopalonline.org
मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहा तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी की राहें धुंधली होती जा रही हैं। 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से ईरान पर किए गए हमलों ने इस क्षेत्र के भूगोल और भविष्य को बदल कर रख दिया है। यह संघर्ष अब केवल दो देशों के बीच की रंजिश नहीं, बल्कि वैश्विक शक्तियों के शक्ति प्रदर्शन और अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है।
हमले की शुरुआत: ऑपरेशन ‘ब्लू स्पैरो’ और ईरान को ‘अंधा’ करने की रणनीति
28 फरवरी 2026 की उस काली रात ने इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के 2000 से ज्यादा ठिकानों पर मिसाइलों की बारिश कर दी। इस हमले के पीछे का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को पूरी तरह नष्ट करना था। रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल ने ‘ब्लू स्पैरो’ मिसाइलों का उपयोग कर ईरान के रडार सिस्टम को पहले ही चरण में ‘ब्लाइंड’ यानी अंधा कर दिया था। इस हमले में न केवल सैन्य ठिकाने बल्कि बुशहर जैसे महत्वपूर्ण परमाणु संयंत्रों को भी निशाना बनाया गया।
नेतृत्व को झटका: सुप्रीम लीडर और शीर्ष कमांडरों की मौत
इस युद्ध की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर ईरान के शीर्ष नेतृत्व का खात्मा रही। हमलों के शुरुआती दौर में ही ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई और आईआरजीसी (IRGC) के कई बड़े कमांडरों के मारे जाने की पुष्टि हुई। सुप्रीम लीडर की मृत्यु ने ईरान के शासन और उसकी सैन्य रणनीति को गहरा झटका दिया है, जिससे देश के भीतर नेतृत्व का संकट पैदा हो गया है। इसके बावजूद, ईरानी सेना ने अपनी ‘3-फेज’ वॉर स्ट्रैटजी के तहत जवाबी हमले जारी रखे हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य की बंदी: वैश्विक तेल संकट और 6 अप्रैल की डेडलाइन
युद्ध के जवाब में ईरान ने अपनी सबसे घातक चाल चलते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने का ऐलान कर दिया। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इस बंदी के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं। अमेरिका ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि 6 अप्रैल 2026 तक हॉर्मुज का रास्ता नहीं खोला गया, तो वह ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर और भी भयानक हमले करेगा।
भारत पर असर: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें और रुपए की गिरावट
इस वैश्विक तनाव की तपिश भारत तक भी पहुँच रही है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।
- ईंधन की कीमतें: वैश्विक बाजार में तेल महंगा होने से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें दबाव में हैं, वहीं रसोई गैस (LPG) के दामों में बढ़ोतरी शुरू हो चुकी है।
- मुद्रा में गिरावट: डॉलर की मांग बढ़ने के कारण भारतीय रुपया गिरकर 92 प्रति डॉलर के निचले स्तर पर पहुँच गया है।
- हवाई सफर: तेल की कीमतों में 30% तक की उछाल आने से विमान ईंधन (ATF) महंगा हो गया है, जिससे हवाई टिकटों के दाम आसमान छू रहे हैं।
कूटनीतिक गतिरोध और भविष्य की आशंकाएं
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 11 मार्च को एक प्रस्ताव पारित कर हमलों को रोकने की मांग की थी, लेकिन रूस और चीन के तटस्थ रहने से इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बातचीत का प्रस्ताव रखा है, जिसमें ईरान के परमाणु संवर्धन को पूरी तरह बंद करने की शर्त रखी गई है। हालांकि, ईरान ने फिलहाल किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है और नुकसान की भरपाई की मांग की है। जैसे-जैसे 6 अप्रैल की समयसीमा करीब आ रही है, दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह युद्ध तीसरे विश्व युद्ध की आहट है या शांति का कोई नया रास्ता निकलेगा।
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