इस्लामाबाद/वाशिंगटन।
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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता पूरी तरह विफल होने के बाद हालात गंभीर हो गए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते के अपने-अपने देश पहुंच चुके हैं। विफलता के तुरंत बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान ने पूरी दुनिया में परमाणु युद्ध का डर पैदा कर दिया है। हालांकि रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने मध्यस्थता की बात कही हैं।
इस्लामाबाद वार्ता में क्यों फंसा पेंच?
वार्ता के टूटने का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम और ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर नियंत्रण रहा। अमेरिका ने मांग रखी थी कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नष्ट करे और अंतरराष्ट्रीय निगरानी स्वीकार करे। बदले में ईरान ने अपनी जब्त संपत्तियों को छोड़ने और प्रतिबंध हटाने की शर्त रखी थी। रविवार देर रात तक चली खींचतान के बाद जेडी वेंस ने घोषणा की कि “ईरान ने शांति के बजाय संघर्ष को चुना है।”
डोनाल्ड ट्रम्प की चेतावनी: “एक रात में मिट जाएगी सभ्यता”
वार्ता विफल होते ही राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा-
- “ईरान ने अपनी किस्मत खुद लिखी है। अगर उन्होंने होर्मुज का रास्ता तुरंत नहीं खोला, तो एक रात में पूरी सभ्यता मिट जाएगी, जिसे कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा। हम उन्हें पत्थर युग (Stone Age) में वापस भेज देंगे।”
ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की पूरी तरह नाकेबंदी करने का आदेश दे दिया है। यह वही समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने भी पलटवार करते हुए कहा है कि यदि कोई भी अमेरिकी युद्धपोत उनकी सीमा के करीब आया, तो इसे सीधे ‘युद्ध की घोषणा’ माना जाएगा।
इजराइल और मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य जमावड़ा
इस बीच, इजराइल ने अपनी सेना को ‘रेड अलर्ट’ पर डाल दिया है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, लेबनान और सीरिया की सीमाओं पर मिसाइल तैनातियां बढ़ गई हैं। रूस और चीन ने शांति की अपील की है, लेकिन ट्रम्प प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब कूटनीति का समय समाप्त हो चुका है।