देवास एसडीएम सस्पेंड: मंत्री विजयवर्गीय के ‘घंटा’ बयान का सरकारी आदेश में जिक्र पड़ा भारी, सहायक पर भी गिरी गाज

देवास एसडीएम सस्पेंड: मंत्री विजयवर्गीय के ‘घंटा’ बयान का सरकारी आदेश में जिक्र पड़ा भारी, सहायक पर भी गिरी गाज

देवास/उज्जैन: BDC News

मध्य प्रदेश के देवास जिले में एक प्रशासनिक चूक ने बड़ा राजनीतिक और सरकारी संकट खड़ा कर दिया है। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के चर्चित ‘घंटा’ वाले बयान का उल्लेख एक आधिकारिक सरकारी आदेश में करना देवास के एसडीएम आनंद मालवीय को भारी पड़ गया। मामला उजागर होते ही शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए एसडीएम को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद प्रदेश का सियासी पारा चढ़ा हुआ था। इस दौरान पत्रकारों के एक सवाल पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने ‘घंटा’ शब्द का प्रयोग किया था, जिस पर कांग्रेस ने तीखी आपत्ति जताते हुए प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया। इसी प्रदर्शन के मद्देनजर देवास एसडीएम आनंद मालवीय ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक आधिकारिक आदेश जारी किया, लेकिन इस आदेश की ‘भाषा’ ही उनके निलंबन का कारण बन गई।

आदेश में क्या था आपत्तिजनक?

आमतौर पर प्रशासनिक आदेशों में धारा 144 या पुलिस बल की तैनाती जैसे तकनीकी निर्देश होते हैं। लेकिन एसडीएम द्वारा जारी इस वायरल लेटर में:

  • कांग्रेस द्वारा लगाए गए सरकार विरोधी आरोपों का विस्तृत विवरण था।
  • इंदौर में हुई मौतों के आंकड़ों का जिक्र था।
  • सबसे गंभीर बात यह थी कि इसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की ‘घंटा’ टिप्पणी का सीधा उल्लेख किया गया था।

आदेश का ड्राफ्ट पूरी तरह से कांग्रेस के ज्ञापन की भाषा से प्रेरित लग रहा था, जिसे शासन ने घोर अनुशासनहीनता और प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन माना।


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दो पर गिरी गाज, नए एसडीएम की नियुक्ति

मामले की गंभीरता को देखते हुए उज्जैन संभाग आयुक्त आशीष सिंह ने एसडीएम आनंद मालवीय के निलंबन का आदेश जारी किया। वहीं, देवास कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने आदेश की टाइपिंग और ड्राफ्टिंग में लापरवाही बरतने वाले सहायक ग्रेड-3 अमित चौहान को भी निलंबित कर दिया है।

प्रशासनिक रिक्तता को भरते हुए शासन ने अभिषेक शर्मा को देवास का नया एसडीएम नियुक्त किया है। नए एसडीएम ने कार्यभार संभालते ही स्पष्ट किया कि भविष्य में सभी सरकारी संचार केवल तय प्रशासनिक प्रोटोकॉल के तहत ही किए जाएंगे।

विपक्ष को मिला मुद्दा

इस घटना के बाद कांग्रेस ने इसे प्रशासन के ‘भ्रमित’ होने और सरकार के ‘दबाव’ का उदाहरण बताया है। वहीं, सत्ता पक्ष के लिए यह स्थिति खासी असहज रही, जिसके चलते कुछ ही घंटों के भीतर यह बड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की गई।

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