ऑपरेशन रोअरिंग: अमेरिका-इजरायल ने 1200 बमों और 200 फाइटर जेट्स से किया ईरान पर हमला

ऑपरेशन रोअरिंग मिशन खामेनई ऑपरेशन रोअरिंग मिशन खामेनई

नई दिल्ली/तेहरान| BDC News|bhopalonline.org

मध्य पूर्व (Middle East) के आसमान में मँडराते बारूद के बादलों के बीच अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस साझा ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन रोअरिंग’ (Operation Roaring) नाम दिया गया है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला आधुनिक सैन्य इतिहास के सबसे सटीक और विध्वंसक हमलों में से एक है।

सैन्य ताक़त का भयानक प्रदर्शन

इस ऑपरेशन की भयावहता का अंदाज़ा इन आंकड़ों से लगाया जा सकता है:

  • 200 फाइटर जेट्स: इजरायल के F-35 अडिर और अमेरिका के स्टील्थ बॉम्बर्स ने एक साथ उड़ान भरी।
  • 1200 सटीक बम: दुश्मन के रडार को चकमा देने वाले हाई-टेक लेजर गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया गया।
  • 500 रणनीतिक ठिकाने: ईरान के भीतर परमाणु केंद्रों, मिसाइल डिपो और सैन्य कमांड सेंटरों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया।

‘मिशन खामेनेई’: कैसे बिछाया गया जाल?

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य नेतृत्व क्षमता (Command & Control) को पंगु बनाना था। इसे ‘मिशन खामेनेई’ का नाम इसलिए दिया गया क्योंकि इसका निशाना सीधे तौर पर शासन के शीर्ष सुरक्षा ढांचे पर था।

ऑपरेशन के मुख्य चरण:

  1. साइबर हमला: हमले से ठीक पहले ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को साइबर अटैक के जरिए जाम कर दिया गया।
  2. रडार का सफाया: पहले वेव में ईरान के लॉन्ग-रेंज रडार और एंटी-एयरक्राफ्ट बैटरी को नष्ट किया गया।
  3. टारगेटेड स्ट्राइक: इसके बाद 200 लड़ाकू विमानों ने ईरान के भीतरी इलाकों में घुसकर 500 पूर्व-निर्धारित ठिकानों पर बमबारी की।

परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर चोट

दावा किया जा रहा है कि इस हमले में ईरान के भूमिगत मिसाइल बेस और कुछ महत्वपूर्ण परमाणु संयंत्रों को गंभीर नुकसान पहुँचा है। अमेरिकी पेंटागन के सूत्रों का कहना है कि यह हमला केवल जवाबी कार्रवाई नहीं थी, बल्कि ईरान की भविष्य की हमलावर क्षमता को समाप्त करने की एक सोची-समझी रणनीति थी।

ईरान का पलटवार और वैश्विक तनाव

ईरान ने इस हमले को ‘कायरतापूर्ण’ बताते हुए कड़े प्रतिरोध की चेतावनी दी है। दुनिया भर में इस हमले के बाद हड़कंप मचा हुआ है, क्योंकि तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और मिडिल ईस्ट में बड़े पैमाने पर विस्थापन शुरू हो गया है।


सैन्य बेड़े की ताकत: अमेरिका और इजरायल का घातक तालमेल

विशेषता/हथियारF-35 ‘अडिर’ (इजरायल)B-2 स्पिरिट स्टील्थ बॉम्बर (USA)F-22 रैप्टर (USA)
मुख्य भूमिकामल्टीरोल स्टील्थ फाइटरलॉन्ग-रेंज स्ट्रैटेजिक बॉम्बरएयर सुपीरियरिटी फाइटर
विशेष खासियतरडार की पकड़ में न आने वाली ‘अदृश्य’ तकनीक।एक बार में 20 टन से ज्यादा बम गिराने की क्षमता।दुनिया का सबसे घातक डॉगफाइट विमान।
मिशन में कार्यईरानी रडार और एयर डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त करना।गहरे भूमिगत (Underground) बंकरों और परमाणु ठिकानों को नष्ट करना।अन्य फाइटर जेट्स को सुरक्षा देना और हवाई क्षेत्र पर कब्जा।

इस्तेमाल किए गए घातक बम और मिसाइलें

हथियार का नामप्रकार (Type)मुख्य उद्देश्यमारक क्षमता
GBU-57 MOPबंकर बस्टर बमपहाड़ों के नीचे छिपे परमाणु केंद्रों को भेदना।60 फीट कंक्रीट को चीरने की क्षमता।
JASSM-ERक्रूज मिसाइललंबी दूरी से सटीक निशाना साधना।900+ किलोमीटर की रेंज।
स्पाइस-2000स्मार्ट गाइडेड बमघनी आबादी वाले क्षेत्रों में सटीक सैन्य ठिकानों को उड़ाना।GPS और लेजर गाइडेड परिशुद्धता।
रैम्पेज (Rampage)सुपरसोनिक मिसाइलसंचार केंद्रों और कमांड पोस्ट को अचानक तबाह करना।आवाज की गति से भी तेज हमला।

रणनीतिक विश्लेषण: ‘मिशन खामेनेई’ क्यों सफल रहा?

  1. इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: हमले से पहले ‘ग्रोलर’ (Growler) विमानों ने ईरान के पूरे संचार तंत्र को ‘जैम’ (Jam) कर दिया था, जिससे ईरानी कमांडरों को हमले की भनक तक नहीं लगी।
  2. सटीक निशाना (Surgical Precision): 500 ठिकानों पर एक साथ हमले का मतलब था कि ईरान को संभलने या जवाबी कार्रवाई करने का मौका ही नहीं मिला।
  3. सिंक्रनाइज़ेशन: अमेरिका के उपग्रहों (Satellites) ने रीयल-टाइम डेटा प्रदान किया, जिससे इजरायली जेट्स ने सीधे ‘किल जोन’ में प्रवेश किया।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस ऑपरेशन में इस्तेमाल की गई तकनीक ने पारंपरिक युद्ध के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है

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