धार/भोपाल:
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मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक ऐतिहासिक और युगांतकारी निर्णय के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर एक नया और बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी कर दिया है। एएसआइ ने अपने इस आधिकारिक आदेश में पहली बार इस विवादित स्थल को स्पष्ट रूप से ‘राजा भोज द्वारा स्थापित भोजशाला एवं संस्कृत पाठशाला’ के रूप में संबोधित किया है। विशेष बात यह है कि इस नए आदेश में पूर्व में प्रयुक्त होने वाले ‘कमाल मौला मस्जिद’ संबंधी किसी भी उल्लेख या संदर्भ को पूरी तरह से हटा दिया गया है, जो इस स्थल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
देवी वाग्देवी को समर्पित मंदिर और निर्बाध प्रवेश की अनुमति
एएसआइ द्वारा जारी इस नए आदेश में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के फैसले और वैज्ञानिक सर्वेक्षण के दौरान मिले साक्ष्यों का स्पष्ट हवाला दिया गया है। आदेश में आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया गया है कि यह परिसर प्राचीन काल में संस्कृत शिक्षा, साहित्यिक विमर्श और शोध का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक केंद्र रहा है। इसके साथ ही इसे अकाट्य रूप से विद्या की देवी ‘वाग्देवी’ (मां सरस्वती) को समर्पित एक पवित्र मंदिर बताया गया है। नए दिशा-निर्देशों के तहत अब भोजशाला परिसर में श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं के लिए पूजा-अर्चना, वंदना और अध्ययन संबंधी गतिविधियों के लिए निर्बाध प्रवेश देने की बात कही गई है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब वर्ष के सभी 365 दिनों तक हिंदुओं के लिए नियमित पूजा का मार्ग पूरी तरह से साफ हो गया है।
एएमएएसआर एक्ट के तहत संरक्षित स्मारक बना रहेगा परिसर
यद्यपि पूजा और निर्बाध प्रवेश के रास्ते खोल दिए गए हैं, लेकिन इस परिसर के प्रशासनिक दर्जे में कानूनन कोई ढील नहीं दी जाएगी। आदेश में यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है कि भोजशाला परिसर पहले की तरह ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का एक केंद्रीय संरक्षित स्मारक बना रहेगा। इसका संपूर्ण संचालन और रखरखाव ‘प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम’ (AMASR Act 1958) के सख्त प्रावधानों के तहत ही किया जाएगा। एएसआइ ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की दैनिक प्रशासनिक, सुरक्षात्मक और व्यावहारिक व्यवस्थाएं धार जिला प्रशासन के साथ मिलकर तय की जाएंगी, ताकि इस अमूल्य धरोहर की मूल संरचना को कोई नुकसान न पहुंचे।
सुरक्षा और धार्मिक गतिविधियों की प्रकृति पर जिला प्रशासन का नियंत्रण
स्मारक की संवेदनशीलता और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एएसआइ और धार जिला प्रशासन आपसी सहमति से ही यहां होने वाली धार्मिक गतिविधियों की प्रकृति और समय-सारणी का निर्धारण करेंगे। इस समन्वय का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियमित पूजा और आगंतुकों की आमद के कारण इस प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक की सुरक्षा, संरक्षण तथा इसके पुरातात्विक महत्व पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े। स्थानीय प्रशासन बहुत जल्द इस संबंध में विस्तृत सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रवेश नियमावली जारी कर सकता है, जिससे व्यवस्था पूरी तरह सुचारू रूप से संचालित हो सके।
मध्य प्रदेश और देश की अन्य बड़ी सुर्खियां (Latest Updates)
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