Manipur Viral Video Fact Check: पिछले कुछ घंटों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से जंगल की आग की तरह फैल रहा है। दावा किया जा रहा है कि मणिपुर में भारी जनविरोध के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने अपने हथियार डाल दिए हैं और वहां से पीछे हट रहे हैं।
लेकिन क्या वाकई ऐसा है? जब हमारी टीम ने इसकी गहराई से पड़ताल की, तो सच कुछ और ही निकला। यह न केवल एक अफवाह है, बल्कि भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए सीमा पार से चलाया जा रहा एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।
क्या है पूरा मामला?
सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स, खासकर एक्स (Twitter) और फेसबुक पर कुछ ‘प्रो-पाकिस्तानी’ हैंडल्स द्वारा एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में सुरक्षा बलों की हलचल देखी जा सकती है। वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा जा रहा है कि मणिपुर के कुछ इलाकों में जनता के भारी विरोध के कारण भारतीय सेना और सुरक्षा बलों ने हार मान ली है और वे अपने हथियार छोड़कर वापस जा रहे हैं।
इस खबर ने इंटरनेट पर हलचल मचा दी और लोग सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने लगे। हालांकि, केंद्र सरकार की आधिकारिक एजेंसी PIB Fact Check ने इस दावे को पूरी तरह से फर्जी (Fake) करार दिया है।
वायरल वीडियो का असली सच: मणिपुर नहीं, त्रिपुरा का है मामला
सच्चाई यह है कि वायरल हो रहा यह वीडियो न तो मणिपुर का है और न ही इसका हालिया किसी विरोध प्रदर्शन से कोई लेना-देना है।
पड़ताल के मुख्य बिंदु:
- पुराना वीडियो: यह वीडियो नया नहीं है, बल्कि इसे 18 नवंबर 2025 को इंटरनेट पर अपलोड किया गया था।
- स्थान: यह वीडियो मणिपुर का नहीं, बल्कि त्रिपुरा के सिपाहीजाला (Sepahijala) जिले का है।
- घटना का संदर्भ: यह वीडियो त्रिपुरा पुलिस द्वारा चलाए गए एक एंटी-नार्कोटिक्स ऑपरेशन (नशे के खिलाफ कार्रवाई) से संबंधित है। उस समय पुलिस की टीम ड्रग्स के खिलाफ छापेमारी करने गई थी।
- गलत व्याख्या: उस सामान्य पुलिस कार्रवाई के वीडियो को आज गलत संदर्भ में मणिपुर का बताकर पेश किया जा रहा है।
क्यों फैलाई जा रही है ऐसी अफवाह?
मणिपुर पिछले कुछ समय से संवेदनशील स्थिति से गुजर रहा है। ऐसे में असामाजिक तत्व और विदेशी बॉट्स इस स्थिति का फायदा उठाकर अशांति फैलाने की कोशिश करते हैं।
- भ्रम पैदा करना: इस तरह के वीडियो का मकसद स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों के बीच अविश्वास पैदा करना है।
- अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगेंडा: भारत विरोधी हैंडल्स अक्सर ऐसे वीडियो का सहारा लेकर यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि भारत के आंतरिक हालात काबू से बाहर हैं।
- मनोवैज्ञानिक दबाव: सेना और पुलिस के मनोबल को प्रभावित करने के लिए अक्सर ‘हथियार डालने’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।
सावधान रहें: किसी भी संवेदनशील जानकारी को साझा करने से पहले उसकी पुष्टि आधिकारिक स्रोतों से जरूर करें। अफवाहें फैलाना कानूनन अपराध है।
आम जनता पर इसका असर और जिम्मेदारी
डिजिटल युग में एक गलत जानकारी लाखों लोगों को गुमराह कर सकती है। मणिपुर जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बिना सोचे-समझे शेयर की गई एक पोस्ट जमीनी स्तर पर तनाव बढ़ा सकती है।
एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हमें समझना होगा कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज़ सच नहीं होती। विशेष रूप से जब बात राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना की हो, तो केवल सरकारी सूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए।
कैसे पहचानें फेक न्यूज़?
- सोर्स चेक करें: देखें कि खबर किसी प्रतिष्ठित न्यूज़ संस्थान ने दी है या सिर्फ अनजान सोशल मीडिया हैंडल्स पर है।
- पुरानी तारीखें: अक्सर पुरानी घटनाओं के वीडियो को नई तारीख के साथ पेश किया जाता है।
- अतिशयोक्ति: अगर हेडलाइन बहुत ज्यादा भड़काऊ या अविश्वसनीय लगे, तो वह फेक हो सकती है।
प्रोपेगेंडा से बचें
मणिपुर में भारतीय सुरक्षा बलों के पीछे हटने या हथियार डालने की खबरें पूरी तरह निराधार और झूठी हैं। भारतीय सेना और सुरक्षा बल पूरी मुस्तैदी के साथ अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। त्रिपुरा के एक पुराने पुलिस ऑपरेशन के वीडियो को गलत तरीके से पेश करना केवल एक साजिश है।
हमारा सुझाव: अगर आपके पास भी ऐसा कोई वीडियो आता है, तो उसे आगे न भेजें और भेजने वाले को सच से अवगत कराएं।
क्या आप चाहते हैं कि हम इस तरह के और भी वायरल दावों की पोल खोलें? नीचे कमेंट में हमें बताएं या इस लेख को शेयर करके जागरूकता फैलाएं।