रेलवे की ‘सुपरफास्ट’ सप्लाई: किसानों की मौज! इस साल नहीं होगी खाद की किल्लत, टूटा 5 साल का रिकॉर्ड

Indian Railways Record Fertilizer Supply Indian Railways Record Fertilizer Supply

नई दिल्ली | 30 जनवरी 2026
Bhopalonline.org | BDC News : Indian Railways Record Fertilizer Supply : देश के करोड़ों किसानों के लिए एक राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने खरीफ और रबी सीजन 2025-26 के दौरान उर्वरक (Fertilizer) की आपूर्ति को लेकर अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया है। रेल मंत्रालय और उर्वरक विभाग के बीच हुए बेहतरीन तालमेल की वजह से इस साल खेतों तक खाद पहुंचाने की रफ्तार 12% से भी ज्यादा बढ़ गई है।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा उर्वरक रेक मूवमेंट

इस साल रेल मंत्रालय ने खाद की ढुलाई के लिए अपने संसाधनों को पूरी तरह झोंक दिया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई 2025 में रोजाना औसतन 72 रेक लोड किए जा रहे थे, जो सितंबर तक बढ़कर 80 रेक प्रतिदिन हो गए। यह पिछले पांच सालों में खरीफ सीजन का सबसे ऊंचा स्तर है।

रेलवे की इस सक्रियता का सीधा फायदा जमीन पर दिख रहा है:

  • यूरिया की भरमार: 312.40 लाख मीट्रिक टन की जरूरत के मुकाबले सरकार ने 350.45 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया।
  • P&K खाद की उपलब्धता: DAP और NPK जैसे उर्वरकों की भी 287.69 लाख मीट्रिक टन आपूर्ति सुनिश्चित की गई, जो जरूरत से कहीं अधिक है।
  • ऐतिहासिक उछाल: अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच कुल 530.16 लाख मीट्रिक टन खाद की सप्लाई हुई, जो एक नया कीर्तिमान है।
Screenshot2026 01 301348501U7G
2XMW6

तालमेल से मजबूत हुई देश की खाद्य सुरक्षा

उर्वरक विभाग के अनुसार, इस साल रेल मंत्रालय, बंदरगाहों और राज्य सरकारों के बीच जो “रियल-टाइम कोऑर्डिनेशन” दिखा, उसी का नतीजा है कि किसानों को खाद के लिए लंबी कतारों में नहीं लगना पड़ा। यूरिया के लिए कुल 10,841 रेक चलाए गए, जो पिछले साल से 8% ज्यादा हैं। वहीं DAP और अन्य खादों के लिए रेक की संख्या में 18% का बड़ा उछाल देखा गया।


यह भी पढ़ें: रेलवे ने 1 जनवरी से बदला 26 ट्रेनों का समय, भोपाल-इंदौर इंटरसिटी अब 10 मिनट देरी से चलेगी। यात्री अपनी यात्रा से पहले समय सारणी जरूर चेक करें।


किसानों पर क्या होगा असर?

खाद की समय पर और पर्याप्त उपलब्धता का सीधा मतलब है—बेहतर फसल और आर्थिक मजबूती। जब किसान को बुवाई के समय ही खाद मिल जाती है, तो फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों बढ़ती है। सरकार की इस रणनीति से बिचौलियों की मनमानी खत्म हुई है और खाद की कालाबाजारी पर भी लगाम लगी है।

निष्कर्ष: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

भारतीय रेलवे और उर्वरक विभाग का यह साझा प्रयास देश की खाद्य सुरक्षा को नई ऊंचाई पर ले गया है। आंकड़ों में आई यह 12.2% की वृद्धि केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह करोड़ों किसानों के भरोसे की जीत है।

सतत निगरानी और आधुनिक प्लानिंग की वजह से अब भारत का कृषि क्षेत्र खाद की कमी जैसी पुरानी समस्याओं से पूरी तरह उबरता नजर आ रहा है।

बजट 2026: बुजुर्गों को मिल सकता है बड़ा ‘रेल तोहफा’, किराए में 50% छूट!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *