भोपाल मासूम हत्याकांड: ‘हैवान’ अतुल भालसे की फांसी बरकरार

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हाईकोर्ट ने कहा- समाज की अंतरात्मा के लिए मौत की सजा जरूरी

जबलपुर/भोपाल। BDC News/bhopalonline.org

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को दहला देने वाले शाहजहांनाबाद मासूम दुष्कर्म और हत्याकांड मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। माननीय उच्च न्यायालय ने आरोपी अतुल भालसे को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई ‘सजा-ए-मौत’ (फांसी) को बरकरार रखा है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस रामकुमार चौबे की डिवीजन बेंच ने आरोपी की अपील को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यह अपराध ‘विरल से विरलतम’ (Rarest of Rare) श्रेणी में आता है और इसमें किसी भी प्रकार की सहानुभूति की कोई गुंजाइश नहीं है।

हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी: “क्रूरता की सारी हदें पार हुईं”

सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने बच्ची की मेडिकल रिपोर्ट और मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि आरोपी ने 5 साल की मासूम के साथ जो किया, वह केवल अपराध नहीं बल्कि मानवीयता पर कलंक है। अदालत ने अपने फैसले में उल्लेख किया कि आरोपी अतुल भालसे ने न केवल मासूम के साथ यौन हमला किया, बल्कि उसका मुंह दबाकर चाकू से बर्बरता की और अंत में उसकी हत्या कर दी। कोर्ट ने कहा, “ऐसे मामलों में कठोरतम सजा समाज की अंतरात्मा को संतुष्ट करने के लिए अनिवार्य है। अपराधी का कृत्य बेहद क्रूर, अमानवीय और बर्बर है।”

क्या था पूरा मामला?

यह हृदयविदारक घटना 24 सितंबर 2024 को भोपाल के शाहजहांनाबाद थाना क्षेत्र में घटी थी।

  • गुमशुदगी और तलाश: एक महिला ने अपनी 5 साल की मासूम बेटी के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस और स्थानीय लोग दो दिनों तक बच्ची की तलाश करते रहे।
  • शव की बरामदगी: 26 सितंबर को ईदगाह हिल्स स्थित एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग के फ्लैट से भीषण दुर्गंध आने लगी। पुलिस ने जब तलाशी ली, तो बाथरूम में रखी एक प्लास्टिक की पानी की टंकी के अंदर से मासूम का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ।
  • आरोपी की गिरफ्तारी: जांच में सामने आया कि पड़ोस में रहने वाले अतुल भालसे ने बच्ची को बहला-फुसलाकर अगवा किया, उसके साथ दुष्कर्म किया और पहचान उजागर होने के डर से उसकी नृशंस हत्या कर दी।

निचली अदालत से हाईकोर्ट तक का सफर

भोपाल की जिला अदालत ने मामले की गंभीरता और पुलिस द्वारा पेश किए गए ठोस साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए सजा कम करने की गुहार लगाई थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने मेडिकल साक्ष्यों और अपराध की प्रकृति को देखते हुए फांसी की सजा पर अंतिम मुहर लगा दी है। इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार और समाज में न्याय की उम्मीद और मजबूत हुई है।


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