वॉशिंगटन. BDC NEWS
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर भारत के टेक सेक्टर और भारतीय पेशेवरों पर सीधा निशाना साधा है। वॉशिंगटन डीसी में आयोजित एक AI समिट में ट्रम्प ने गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों से भारत में हायरिंग रोकने और अमेरिकियों को पहले नौकरी देने को कहा है।
ट्रम्प ने कहा, ये कंपनियां अमेरिकी स्वतंत्रता का लाभ उठाकर चीन में फैक्ट्रियां लगा रही हैं और भारत से लोगों को भर्ती कर रही हैं, जिससे अमेरिकी टैलेंट के अवसर कम हो रहे हैं। उन्होंने “अमेरिकियों को सबसे पहले नौकरी मिलनी चाहिए” के अपने नारे को दोहराते हुए इन कंपनियों की “ग्लोबलिस्ट माइंडसेट” की आलोचना की।
भारतीय आईटी सेक्टर पर गहरा असर होगा
ट्रम्प के इस बयान से भारत के बड़े आईटी सेक्टर और लाखों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। भारत में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में बड़े कार्यालय हैं, जहाँ लाखों कर्मचारी काम करते हैं।
- आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में 72% H-1B वीजा भारतीयों को मिले थे, जिनमें अधिकांश डेटा साइंस, AI और साइबर सिक्योरिटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों से थे।
- ट्रम्प की इस नई नीति से H-1B वीजा नियम और सख्त हो सकते हैं, जिससे भारतीय पेशेवरों के लिए अमेरिका में नौकरी पाना और भी मुश्किल हो जाएगा।
- भारत में इन कंपनियों द्वारा नई भर्तियों में कमी आने से भारतीय आईटी कंपनियों और स्टार्टअप्स पर भी दबाव बढ़ेगा।
एपल पर भी थी ट्रम्प की ‘भारत विरोधी’ धमकी
यह पहली बार नहीं है जब ट्रम्प ने भारत से संबंधित आर्थिक नीतियों पर आपत्ति जताई है। मई में, उन्होंने एपल के सीईओ टिम कुक को धमकी दी थी कि यदि अमेरिका में बेचे जाने वाले आईफोन का निर्माण भारत या किसी अन्य देश में होता है, तो कंपनी पर कम से कम 25% का टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रम्प ने स्पष्ट किया था कि वह नहीं चाहते कि एपल के उत्पाद भारत में बनें, बल्कि उनका उत्पादन अमेरिका में ही हो।