विवाह में कुंडली मिलान का महत्व भारत में सदियों से माना जाता है। अष्टकूट मिलान प्रणाली में कुल 8 कूट शामिल होते हैं, जिनमें से तारा कूट तीसरा कूट है। इसे दोष निवारक और आयु एवं स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला कूट माना गया है। यदि दम्पत्ति के तारा आपस में मेल खाते हों, तो विवाह के बाद जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शुभ फल मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
शास्त्रों में भी कहा गया है—
“ताराबलं विना विवाहे न शुभं भवेत्” – अर्थात तारा बल के बिना विवाह शुभ परिणाम नहीं देता।
(संदर्भ: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र एवं ज्योतिषरत्नमाला)
तारा कूट क्या है?
तारा कूट जन्म नक्षत्र पर आधारित गणना है। लड़का और लड़की, दोनों के जन्म नक्षत्रों के आधार पर कुल 27 नक्षत्रों को 9-9 नक्षत्रों के समूहों में बांटकर तारा मिलान किया जाता है।
तारा कूट स्वास्थ्य, आयु, मानसिक संतुलन और भविष्य की शुभता का द्योतक है।
यदि तारा अनुकूल न हो तो रिश्ते में तनाव, मानसिक असंतुलन, रोग-संताप, निर्णयों में मतभेद जैसी परिस्थितियाँ हो सकती हैं।
तारा कूट में कुल कितने अंक मिलते हैं?
तारा कूट में कुल 3 अंक (गुण) होते हैं।
- यदि तारे शुभ हों → 3 गुण मिलते हैं
- यदि तारे मध्यम फल दें → 1.5 गुण मिलते हैं (Refer astrologer)
- यदि तारा मेल न खाए → 0 गुण
यानी अच्छे विवाह योग के लिए 3 में से कम-से-कम 2 से ऊपर गुण मिलना बेहतर माना गया है।
शादी से पहले कुंडली मिलान: जानिए क्यों ज़रूरी?
तारा कूट कैसे गणना होती है? (Step-by-Step Process)
तारा गणना जन्म नक्षत्र नंबर पर आधारित होती है।
Method (Simple Explanation)
- लड़के के नक्षत्र क्रम संख्या को लड़की के नक्षत्र क्रम संख्या से भाग दिया जाता है।
- प्राप्त संख्या को 9 से भाग देकर तारा ज्ञात किया जाता है।
- परिणाम अनुसार तारा शुभ या अशुभ माना जाता है।
📄 27 नक्षत्र एवं तारा वर्गीकरण सारणी
| नक्षत्र संख्या | तारा समूह (1-9 चक्र आधारित) |
|---|---|
| 1,10,19 | जन्म तारा |
| 2,11,20 | सम्पत तारा |
| 3,12,21 | विपत तारा |
| 4,13,22 | क्षेम तारा |
| 5,14,23 | प्रयाण तारा |
| 6,15,24 | साधन तारा |
| 7,16,25 | नैऋत्य (वध) तारा |
| 8,17,26 | मित्र तारा |
| 9,18,27 | परमैत्र तारा |
👉 विपत, नैऋत्य (वध) तारा अशुभ माने जाते हैं।
👉 जन्म, सम्पत, क्षेम, मित्र, परमैत्र शुभ श्रेणी में आते हैं।
शुभ और अशुभ तारा कूट का प्रभाव
शुभ तारा होने पर
- दंपत्ति में मानसिक तालमेल अच्छा
- रिश्ते में शांति, प्रेम व समझ
- स्वास्थ्य अच्छे रहने की संभावना
- आर्थिक उन्नति व जीवन में प्रगति
तारा मिलान खराब होने पर
- दांपत्य तनाव और मतभेद
- रोग-संताप या स्वास्थ्य समस्याएँ
- निर्णयों में टकराव व मानसिक बेचैनी
- आर्थिक अस्थिरता व भविष्य चिंता
👉 लेकिन ध्यान रहे — केवल तारा कूट खराब होने से विवाह असफल नहीं कहा जा सकता। अन्य कूट साथ में यदि अच्छे हों तो दोष कम हो सकता है।
तारा कूट का उल्लेख किन ग्रंथों में मिलता है?
तारा कूट का वर्णन निम्न ज्योतिष ग्रंथों में मिलता है—
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र
- विवाह पटल ज्योतिष सार
- ज्योतिष रत्नमाला
- अष्टकूट मिलान (कौटिल्य ज्योतिष मत)
इन शास्त्रों के अनुसार तारा बल दाम्पत्य जीवन की जीवन ऊर्जा और स्वास्थ्य स्थिरता का सूचक है।
वर्ण कूट क्या है? विवाह कुंडली मिलान में इसका महत्व
तारा कूट सही मेल करने के लिए टिप्स
- केवल नक्षत्र मिलान नहीं, नक्षत्र स्वामी का मेल भी देखें
- यदि तारा दोष हो तो उपाय/शांति करा सकते हैं
- पूर्ण फैसला कभी केवल एक कूट के आधार पर न लें
Q1. क्या केवल तारा कूट खराब हो तो शादी नहीं करनी चाहिए?
जरूरी नहीं। यदि अन्य कूट जैसे गुण, जन्म, ग्रह, प्रेम व समझ अच्छी हो तो विवाह सफल हो सकता है।
Q2. तारा दोष का उपाय क्या है?
नक्षत्र शांति, मंत्र जप, रत्न धारण और विवाह से पहले पूजन आदि किए जाते हैं।
Q3. कितने गुण मिलने पर विवाह शुभ है?
3 में से 2-3 गुण मिलना श्रेष्ठ माना जाता है।
Conclusion
तारा कूट विवाह Matching में एक महत्वपूर्ण कूट है जो स्वास्थ्य, आयु, मानसिक संतुलन और रिश्ते की शुभता को दर्शाता है। यदि तारा शुभ हो तो दांपत्य जीवन स्थिर और खुशहाल होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि निर्णय अंतिम रूप से संपूर्ण कुंडली विश्लेषण से ही करना चाहिए।