आसान भाषा में समझें आज की 6 बड़ी बातें
नई दिल्ली|भोपाल| BDC News|bhopalonline.org
आज 29 जनवरी है और आज का दिन हम सबके लिए बहुत जरूरी है। सरकार आज अपना ‘आर्थिक रिपोर्ट कार्ड’ यानी इकोनॉमिक सर्वे (Economic Survey 2026) पेश करने जा रही है।
सरल शब्दों में कहें तो, यह सर्वे बताएगा कि पिछले एक साल में देश ने कितना कमाया, कितना गंवाया और आने वाले दिनों में आपकी थाली में दाल-सब्जी महंगी होगी या सस्ती। चलिए, इसे उन 6 पॉइंट्स में समझते हैं जो सीधे आपकी जिंदगी से जुड़े हैं।
1. आपकी रसोई और महंगाई (Inflation)
सबसे बड़ा सवाल- क्या कीमतें गिरेंगी? सर्वे में यह बताया जाएगा कि तेल, दाल और सब्जियों के दाम क्यों बढ़े। क्या आने वाले महीनों में हमें महंगाई से राहत मिलने वाली है?
2. GDP: क्या हम सबसे आगे हैं?
GDP का मतलब है देश की तरक्की की रफ़्तार। अगर हमारी GDP बढ़ती है, तो इसका मतलब है कि देश में पैसा आ रहा है, नए बिजनेस खुल रहे हैं और पूरी दुनिया में भारत का डंका बज रहा है।
3. नौकरी: युवाओं के लिए क्या खबर है?
IT सेक्टर में छंटनी होगी या नई भर्तियां? मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कितने अवसर हैं? युवाओं के लिए यह सर्वे किसी गाइड से कम नहीं है, क्योंकि इसमें बताया जाता है कि आने वाले समय में किस सेक्टर में नौकरियां मिलेंगी।
4. खेती-किसानी: अन्नदाता की आय
देश की आधी आबादी खेतों से जुड़ी है। सर्वे से पता चलेगा कि ओलावृष्टि और मौसम की मार के बावजूद खेती की क्या हालत है और क्या सरकार किसानों के लिए कुछ नया करने जा रही है।
5. सरकारी कर्ज और राजकोषीय घाटा
जैसे हम अपने घर का बजट बनाते हैं, वैसे ही सरकार भी बनाती है। ‘राजकोषीय घाटा’ (Fiscal Deficit) जितना कम होगा, देश की अर्थव्यवस्था उतनी ही मजबूत होगी और महंगाई पर काबू पाना उतना ही आसान होगा।
6. रुपया कितना मजबूत? (Foreign Reserves)
विदेशी मुद्रा भंडार यानी हमारी ‘तिजोरी’ कितनी भरी है? यह तिजोरी जितनी भरी होगी, डॉलर के मुकाबले हमारा रुपया उतना ही डटा रहेगा और विदेशों से सामान मंगवाना सस्ता होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल: आखिर ये ‘इकोनॉमिक सर्वे’ है क्या?
1. ये होता क्या है? यह देश की इकोनॉमी का एक साल का पूरा हिसाब-किताब है। समझ लीजिए कि यह बजट से पहले का ‘प्रोग्रेस कार्ड’ है, जो बताता है कि पिछले साल हमने क्या हासिल किया।
2. इसे बनाता कौन है? इसे वित्त मंत्रालय की एक खास टीम बनाती है, जिसकी अगुवाई मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) करते हैं। अभी यह जिम्मेदारी डॉ. वी अनंत नागेश्वरन के पास है।
3. क्या सरकार इसकी बात मानने के लिए मजबूर है? नहीं। यह सरकार के लिए एक सलाह या दिशा-निर्देश की तरह होता है। सरकार इसे मानने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य नहीं है, लेकिन आमतौर पर बजट इसी के सुझावों को ध्यान में रखकर बनाया जाता है।
4. इसका इतिहास क्या है? भारत का पहला इकोनॉमिक सर्वे 1950-51 में पेश हुआ था। पहले यह बजट का ही हिस्सा होता था, लेकिन 1964 से इसे बजट से एक दिन पहले अलग से पेश किया जाने लगा।
भोपाल ऑनलाइन की राय:
इकोनॉमिक सर्वे हमें यह समझने में मदद करता है कि अगले एक साल में हमें अपने घर का बजट कैसे प्लान करना है। यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि आपकी और हमारी तरक्की का आईना है।
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