अपने ऑल-टाइम हाई से भारी डिस्काउंट पर कीमती धातुएं
नई दिल्ली/मुंबई | बिजनेस डेस्क|BDC News| bhopalonline.org
वैश्विक बाजारों में मची उथल-पुथल का असर अब सोने और चांदी की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। जहाँ एक ओर शेयर बाजार धराशायी हो रहा है, वहीं कीमती धातुओं में भी भारी ‘पैनिक सेलिंग’ (घबराहट में बिकवाली) देखने को मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, आज रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई है।
आज की कीमतों का हाल (Gold-Silver Rates Today)
- चांदी (Silver): एक ही दिन में चांदी की कीमत 20,000 रुपये प्रति किलो गिरकर 2.30 लाख रुपये पर आ गई है। कल तक इसकी कीमत 2.50 लाख रुपये थी।
- सोना (Gold): 24 कैरेट सोने की कीमतों में 8,000 रुपये की बड़ी गिरावट आई है। अब 10 ग्राम सोने का भाव 1.48 लाख रुपये हो गया है, जो कल तक 1.56 लाख रुपये था।
- 5 दिनों का असर: अमेरिका-ईरान जंग के बीच पिछले 5 कारोबारी दिनों में सोना 13 हजार और चांदी 38 हजार रुपये सस्ती हो चुकी है।
ऑल-टाइम हाई से कितना सस्ता हुआ? (Price Journey 2026)
साल 2026 की शुरुआत में सोना-चांदी रिकॉर्ड स्तर पर थे, लेकिन अब वहां से कीमतें काफी नीचे आ चुकी हैं:
| धातु | ऑल-टाइम हाई (29 जन. 2026) | मौजूदा भाव (19 मार्च) | कुल गिरावट |
| सोना (10g) | ₹1.76 लाख | ₹1.48 लाख | ₹28,000 |
| चांदी (1kg) | ₹3.86 लाख | ₹2.30 लाख | ₹1.56 लाख |
गिरावट की मुख्य वजहें: आखिर क्यों चमक खो रही हैं धातुएं?
आमतौर पर जंग के माहौल में सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार बाजार का गणित उल्टा है:
- ‘कैश’ पर भरोसा: मिडिल ईस्ट जंग की अनिश्चितता के बीच निवेशक जोखिम नहीं लेना चाहते। वे अपनी गोल्ड और सिल्वर होल्डिंग्स बेचकर ‘लिक्विड कैश’ इकट्ठा कर रहे हैं ताकि आपात स्थिति में नकदी पास रहे।
- भारी प्रॉफिट बुकिंग: जनवरी में कीमतें ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गई थीं। बड़े संस्थानों और निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपना मुनाफा वसूलना (Selling) शुरू कर दिया है, जिससे बाजार में अचानक सप्लाई बढ़ गई।
- US फेड का रुख: अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर सख्त रुख अपनाने से वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है।
4. एक्सपर्ट की राय: निवेश करें या इंतजार?
कमोडिटी एक्सपर्ट के अनुसार, “सोना-चांदी में अभी गिरावट का दौर थमा नहीं है। आने वाले दिनों में कीमतें और नीचे आ सकती हैं। फिलहाल निवेशकों को नई खरीदारी से बचना चाहिए और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करना चाहिए।”
19 मार्च की यह गिरावट दर्शाती है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में लिक्विडिटी (नकदी) सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। चांदी में पिछले 49 दिनों में 1.56 लाख रुपये की कमी यह संकेत देती है कि सट्टेबाजी के सौदे तेजी से बाहर निकल रहे हैं।