स्कूली बच्चों की बौद्धिक क्षमता निखारने की अनूठी पहल: ‘The Aghora Society’ की कार्यशाला में सीखे वाद-विवाद के गुर

The Aghora Society The Aghora Society

शिक्षा एवं संस्कृति डेस्क (Bhopal Online): आज के आधुनिक युग में केवल किताबी ज्ञान ही बच्चों के भविष्य के लिए पर्याप्त नहीं है। बच्चों में आत्मविश्वास, मंच पर बोलने की कला (Public Speaking) और अपनी बात को तर्कों के साथ रखने की क्षमता होना अनिवार्य है। इसी उद्देश्य को लेकर The Aghora Society for Art, Culture and Social Welfare द्वारा स्कूली बच्चों की बौद्धिक क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक विकास के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन निरंतर किया जा रहा है।

इस अभियान के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को मंच की बारीकियां सिखाई जा रही हैं, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।


अघोरा सोसाइटी कार्यशाला – भविष्य के वक्ताओं का निर्माण


1. 12 जनवरी का विशेष सत्र: सूरज प्रकाश पांडेय ने दी ट्रेनिंग

इसी शिक्षण क्रम में 12 जनवरी 2026 को आयोजित सत्र बेहद खास रहा। इस दिन विषय विशेषज्ञ के रूप में मशहूर प्रशिक्षक श्री सूरज प्रकाश पांडेय ने शिरकत की। उन्होंने दो प्रमुख विद्यालयों—हायर सेकेंडरी स्कूल, शिवपुरवा 603 और आर बी एस पब्लिक स्कूल, सुपिया—के छात्र-छात्राओं से संवाद किया।

श्री पांडेय ने कार्यशाला के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:

  • कविता पाठ की कला: कविता केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि भावों का समुद्र है। उन्होंने बच्चों को सिखाया कि कैसे शब्दों के उतार-चढ़ाव (Modulation) से कविता प्रभावी बनती है।
  • वाद-विवाद (Debate): वाद-विवाद का अर्थ केवल बहस करना नहीं, बल्कि अपने पक्ष को तर्कों और शालीनता के साथ मंच पर रखना है।
  • मंच का डर (Stage Fright): उन्होंने बच्चों को ‘Stage Fear’ से बाहर निकलने के मनोवैज्ञानिक तरीके भी समझाए।

2. ‘The Aghora Society’ के अभियान का उद्देश्य

सोसाइटी के पदाधिकारियों के अनुसार, इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य केवल सिखाना ही नहीं, बल्कि बच्चों को फरवरी के पहले सप्ताह में होने वाली ‘अंतर-विद्यालयीन प्रतियोगिता’ के लिए तैयार करना है।

अभियान की मुख्य विशेषताएं:

  1. प्रतिभागी: इस प्रतियोगिता में तीन अलग-अलग विद्यालयों के कक्षा 7वीं से 9वीं तक के विद्यार्थी शामिल होंगे।
  2. निरंतरता: यह अभियान 7 जनवरी 2026 से निरंतर जारी है, जिसका शुभारंभ विशेषज्ञ श्री अजय दाहिया के सानिध्य में हुआ था।
  3. व्यक्तित्व विकास: सोसाइटी का मानना है कि वाद-विवाद और कविता पाठ से बच्चों की सोचने की शक्ति (Critical Thinking) विकसित होती है।

3. ग्रंथों और महान विचारकों का संदर्भ (Scriptural & Literary Reference)

मंच कला और वाणी के महत्व पर हमारे ग्रंथों में भी काफी कुछ कहा गया है।

  • ऋग्वेद में कहा गया है कि “वाणी ही व्यक्ति का वास्तविक आभूषण है।” (वाग्भूषणं भूषणम्)।
  • स्वामी विवेकानंद ने भी हमेशा जोर दिया था कि युवाओं को निर्भय होकर अपनी बात समाज के सामने रखनी चाहिए। अघोरा सोसाइटी का यह प्रयास इन्हीं प्राचीन मूल्यों को आधुनिक शिक्षा पद्धति से जोड़ रहा है।
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4. स्कूलों में उत्साह का माहौल: शिवपुरवा और सुपिया की रिपोर्ट

कार्यशाला के दौरान हायर सेकेंडरी स्कूल, शिवपुरवा 603 और आर बी एस पब्लिक स्कूल, सुपिया के बच्चों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। विद्यार्थियों ने न केवल विशेषज्ञ की बातों को ध्यान से सुना, बल्कि खुद भी मंच पर आकर अभ्यास किया।

बच्चों ने क्या सीखा?

  • अपनी आवाज़ की पिच को कैसे नियंत्रित करें।
  • वाद-विवाद के दौरान विपक्षी के तर्कों का सम्मान करते हुए अपनी बात कैसे काटें।
  • कविता पढ़ते समय आंखों के संपर्क (Eye Contact) का महत्व।

5. फरवरी की बड़ी प्रतियोगिता: कौन बनेगा विजेता?

अघोरा सोसाइटी ने घोषणा की है कि फरवरी के पहले सप्ताह में होने वाली प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा। यह प्रतियोगिता कक्षा 7वीं से 9वीं तक के बच्चों के लिए एक बड़ा मंच साबित होगी, जहाँ वे अपनी छिपी हुई प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकेंगे।


FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: The Aghora Society की यह कार्यशाला कब तक चलेगी?

उत्तर: यह कार्यशाला जनवरी माह भर निरंतर जारी रहेगी, जिसका समापन फरवरी के पहले सप्ताह में आयोजित होने वाली प्रतियोगिता के साथ होगा।

प्रश्न 2: इस कार्यशाला में मुख्य रूप से क्या सिखाया जा रहा है?

उत्तर: इसमें मुख्य रूप से कविता पाठ (Poem Recitation), वाद-विवाद (Debate) और सार्वजनिक मंच पर बोलने की कला (Public Speaking) सिखाई जा रही है।

प्रश्न 3: इस अभियान का शुभारंभ कब हुआ था?

उत्तर: इस अभियान का शुभारंभ 7 जनवरी 2026 को विशेषज्ञ श्री अजय दाहिया की उपस्थिति में किया गया था।

प्रश्न 4: इसमें कौन-कौन से विद्यालय शामिल हैं?

उत्तर: वर्तमान में हायर सेकेंडरी स्कूल, शिवपुरवा 603, आर बी एस पब्लिक स्कूल, सुपिया समेत कुल तीन विद्यालयों के बच्चे इसमें भाग ले रहे हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

The Aghora Society for Art, Culture and Social Welfare की यह पहल सराहनीय है। ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर बच्चों को श्री सूरज प्रकाश पांडेय और श्री अजय दाहिया जैसे विशेषज्ञों का मार्गदर्शन मिलना उनके व्यक्तित्व में चार चाँद लगा देगा। ऐसी कार्यशालाएं बच्चों को न केवल एक अच्छा वक्ता बनाती हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भरकर एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाती हैं।

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