भोपाल|BDC News| bhopalonline.org
भोपाल की तासीर में जहाँ एक ओर तहजीब और नफासत घुली है, वहीं इसकी गलियों और पॉश इलाकों के बंद कमरों में कुछ ऐसी खौफनाक दास्तां दफन हैं, जिन्होंने न केवल राजधानी बल्कि पूरे देश के रोंगटे खड़े कर दिए थे। भोपाल की उन ‘मोस्ट चर्चित’ और ‘खौफनाक’ क्राइम फाइल्स का फ्लैशबैक है, जो आज भी पुलिस रिकॉर्ड्स और लोगों के जेहन में आज भी खौफ पैदा कर देती हैं।
पहला मामला

साकेत नगर का ‘दिवार कांड’: उदयन दास और वो खौफनाक सन्नाटा
भोपाल के हालिया इतिहास में अगर कोई सबसे विक्षिप्त अपराधी रहा, तो वह था उदयन दास। यह कहानी साल 2017 की है, जिसने एक पढ़े-लिखे ‘सीरियल किलर’ की मानसिकता को उजागर किया। वारदात की शुरुआत की जिक्र करें तो पश्चिम बंगाल की रहने वाली आकांक्षा शर्मा की दोस्ती उदयन दास से सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। उदयन ने खुद को न्यूयॉर्क में रहने वाला एक बड़ा बिजनेसमैन बताया। आकांक्षा उसके प्यार में इस कदर पागल हुई कि वह घर छोड़कर भोपाल आ गई। साकेत नगर के एक आलीशान मकान में दोनों साथ रहने लगे।
कत्ल और सीमेंट का चबूतरा
विवाद होने पर उदयन ने आकांक्षा की गला दबाकर हत्या कर दी। लेकिन असली दरिंदगी इसके बाद शुरू हुई। पकड़े जाने के डर से उसने आकांक्षा की लाश को एक लोहे के संदूक में डाला और अपने बेडरूम में ही उसे सीमेंट-कंक्रीट से चुनवा दिया। उसने उस पर एक मार्बल का चबूतरा बनवा दिया, जिस पर वह रोज सोता था।
खुलासा और पुराने राज
जब महीनों तक आकांक्षा का संपर्क उसके घरवालों से नहीं हुआ, तो पुलिस की जांच उदयन तक पहुँची। पुलिस ने जब चबूतरा खोदा, तो अंदर से आकांक्षा का कंकाल मिला। जाँच में यह भी पता चला कि उदयन ने इससे पहले रायपुर में अपने माता-पिता की भी हत्या कर उन्हें घर के गार्डन में दफना दिया था और सालों तक उनकी पेंशन डकारता रहा।
दूसरा मामला

‘साइको किलर’ आदेश खांबरा: 33 कत्ल और एक अजीब मुस्कान
भोपाल पुलिस के सामने साल 2018 में एक ऐसा चेहरा आया जिसे देखकर कोई नहीं कह सकता था कि यह शख्स 33 ट्रक ड्राइवरों और क्लीनर का हत्यारा है। मंडीदीप और भोपाल के आसपास सक्रिय आदेश खांबरा एक दर्जी था, लेकिन रात होते ही वह मौत का सौदागर बन जाता था।
मोडस ऑपरेंडी (काम करने का तरीका)
आदेश खांबरा और उसका गैंग ट्रक ड्राइवरों से दोस्ती करते थे। ढाबों पर उनके साथ खाना खाते और शराब पीते। वह चुपके से ड्राइवर की शराब में नशीली दवा मिला देता। जब ड्राइवर बेहोश हो जाता, तो आदेश और उसके साथी उसकी हत्या कर देते और लाश को जंगलों या पुलों के नीचे फेंक देते थे। कत्ल के बाद वे ट्रक में लदा लाखों का सामान बेच देते थे।
ठंडा खून और पुलिस की चुनौती
आदेश खांबरा की गिरफ्तारी के बाद जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने बड़े ही ठंडे दिमाग से अपने कत्ल कबूल किए। उसने कहा कि वह “ड्राइवरों को मुक्ति” दे रहा था। यह भोपाल के इतिहास का सबसे बड़ा हाईवे सीरियल किलिंग केस था।
तीसरा मामला

रसूख, राजनीति और कत्ल: शहला मसूद हत्याकांड
16 अगस्त 2011 की वह सुबह भोपाल कभी नहीं भूल सकता। शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाके कोहेफिजा में आरटीआई एक्टिविस्ट शहला मसूद की उनकी कार के अंदर ही गोली मारकर हत्या कर दी गई।
साजिश की परतें
शहला अपने घर से निकलने वाली थीं, तभी उन्हें पॉइंट ब्लैंक रेंज से गोली मारी गई। शुरुआत में इसे आत्महत्या दिखाने की कोशिश हुई, लेकिन मामला सुलझने के बजाय उलझता गया। इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई।
ट्रायंगल लव और सुपारी
जांच में खुलासा हुआ कि यह हत्या रसूख, राजनीति और ईर्ष्या का परिणाम थी। इंदौर की जाहिदा परवेज ने अपने रसूखदार दोस्त और शहला की नजदीकियों के चलते जलन में आकर शहला की सुपारी दी थी। जाहिदा ने डायरी में कत्ल के दिन का विवरण भी लिखा था। इस केस ने भोपाल के रसूखदार गलियारों की गंदगी को सड़क पर लाकर रख दिया था।
चौथा मामला

मासूमों के साथ दरिंदगी: ‘हप्पू’ और हबड़ी कांड
भोपाल के दामन पर सबसे गहरा दाग साल 2019 का कमला नगर ‘हबड़ी’ कांड है। एक 8 साल की मासूम बच्ची, जो अपने घर के पास से लापता हुई, उसकी लाश अगले दिन पास के ही एक नाले में मिली।
जनता का आक्रोश
इस वारदात ने पूरे भोपाल को सड़कों पर ला दिया था। आरोपी विष्णु प्रसाद उर्फ हप्पू ने मासूम के साथ दरिंदगी की और उसकी हत्या कर दी। इस केस में पुलिस की लापरवाही भी सामने आई थी, जिसके बाद कई पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया।
फास्ट ट्रैक इंसाफ
भोपाल की विशेष अदालत ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को फांसी की सजा दी। यह मामला भोपाल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा टर्निंग पॉइंट बना।
पांचवां मामला

हमीदिया अस्पताल का बच्चा चोरी कांड
क्राइम सिर्फ कत्ल और डकैती नहीं होता, कुछ जुर्म रूह को छलनी कर देते हैं। भोपाल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल हमीदिया से बच्चा चोरी होने की घटनाएं कई बार सुर्खियों में रहीं।
गिरोह का पर्दाफाश
सालों तक एक गिरोह सक्रिय रहा जो गरीब माताओं को अपनी बातों में फंसाकर उनके नवजात बच्चों को गायब कर देता था। पुलिस ने जब जाल बिछाया, तो पता चला कि इन बच्चों को ऊंचे दामों पर निसंतान दंपत्तियों को बेचा जा रहा था। इसमें अस्पताल के कुछ छोटे कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई थी।
छठवां मामला

कोहेफिजा का दोहरा हत्याकांड: वो रहस्यमयी फ्लैट
भोपाल के कोहेफिजा इलाके के एक बंद फ्लैट में जब बदबू आने लगी, तो पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। अंदर का नजारा दिल दहला देने वाला था। एक बुजुर्ग महिला और उनकी बेटी की लाशें गल चुकी थीं।
अपनों की गद्दारी
जांच में पता चला कि यह संपत्ति के लालच में किया गया ‘इनसाइड जॉब’ था। करीबियों ने ही घर की चाबियां हासिल कीं और चुपचाप कत्ल कर फरार हो गए। इस केस ने भोपाल के फ्लैट कल्चर में ‘अकेले रहने वाले बुजुर्गों’ की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े किए थे।
आज भोपाल ‘बुलडोजर न्याय’ और ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ की ओर बढ़ रहा है, लेकिन अतीत के ये घाव आज भी याद दिलाते हैं कि अपराधी किसी भी शक्ल में हो सकता है—चाहे वह साकेत नगर का पढ़ा-लिखा उदयन हो या मंडीदीप का सीधा सा दिखने वाला दर्जी आदेश खांबरा।
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