Headlines

तरुण तेजपाल यौन उत्पीड़न मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा, तहलका के पूर्व संपादक को ठहराया दोषी

तरुण तेजपाल यौन उत्पीड़न मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा,  तहलका के पूर्व संपादक को ठहराया दोषी
👁️ 22 Views

मुंबई। BDC NEWS|
bhopalonline.org

तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। बंबई उच्च न्यायालय ने चर्चित 2013 के यौन उत्पीड़न मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया है। इसके साथ ही अदालत ने गोवा की ट्रायल कोर्ट के उस पुराने फैसले को पूरी तरह से पलट दिया है, जिसमें उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया था। सजा के बिंदु पर अदालत आने वाले समय में अलग से अपना आदेश सुनाएगी।

खंडपीठ का फैसला और पृष्ठभूमि

यह महत्वपूर्ण फैसला न्यायमूर्ति डॉ. नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जामसांडेकर की खंडपीठ ने गोवा सरकार की ओर से दायर अपील को स्वीकार करते हुए सुनाया है। अदालत ने सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने से पहले तरुण तेजपाल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का कड़ा निर्देश दिया था।

यह पूरा मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा में एक प्रतिष्ठित ‘थिंकफेस्ट’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान तहलका पत्रिका की एक महिला सहयोगी ने आरोप लगाया था कि एक होटल की लिफ्ट के अंदर तरुण तेजपाल ने उसका यौन उत्पीड़न किया था। इस मामले की लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मई 2021 में गोवा की एक ट्रायल कोर्ट ने तरुण तेजपाल को राहत देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच का दरवाजा खटखटाया था।

अभियोजन पक्ष की दलीलें और सॉलिसिटर जनरल का तर्क

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जोरदार दलीलें दीं। उन्होंने अदालत को बताया कि निचली अदालत यानी ट्रायल कोर्ट ने शिकायतकर्ता महिला के व्यवहार को लेकर कई पूर्वाग्रहपूर्ण धारणाओं के आधार पर साक्ष्यों का मूल्यांकन किया था।

सॉलिसिटर जनरल ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी यौन उत्पीड़न की पीड़िता की घटना के बाद की प्रतिक्रिया का कोई एक निश्चित या तय मानक नहीं हो सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि निचली अदालत ने शिकायतकर्ता के बयानों में मौजूद बेहद मामूली विरोधाभासों को जरूरत से ज्यादा तूल दिया और उन्हें आवश्यकता से अधिक महत्व दिया।

बचाव पक्ष का पक्ष और मुख्य तर्क

दूसरी ओर, तरुण तेजपाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने अदालत में बचाव पक्ष का पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि अभियोजन पक्ष द्वारा तेजपाल के उस ईमेल को गलत तरीके से पेश किया गया, जिसमें उन्होंने माफी मांगी थी। बचाव पक्ष का कहना था कि इस ईमेल को यौन संबंध की स्वीकारोक्ति के रूप में देखना पूरी तरह से गलत है।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता का कथित व्यवहार, उनके ईमेल्स, व्हाट्सऐप संदेश और अन्य दस्तावेज़ी साक्ष्य अभियोजन पक्ष के दावों और आरोपों से मेल नहीं खाते हैं। इसके अतिरिक्त, यह भी तर्क दिया गया कि चलती हुई लिफ्ट में शिकायतकर्ता को कथित तौर पर कैद रखे जाने का आरोप किसी भी विशेषज्ञ साक्ष्य या सीसीटीवी फुटेज से पुष्ट या साबित नहीं होता है।

हाईकोर्ट का अंतिम निर्णय

दोनों पक्षों की विस्तार से लंबी दलीलें सुनने के बाद, उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह ही इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब अदालत ने ट्रायल कोर्ट के बरी करने वाले आदेश को खारिज करते हुए तरुण तेजपाल को दोषी ठहरा दिया है। अदालत अब इस मामले में सजा को लेकर अलग से सुनवाई कर आदेश पारित करेगी।



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *