ढाका| BDC News|bhopalonline.org
बांग्लादेश में आज 13वें संसदीय चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। करीब डेढ़ साल पहले भड़के छात्र आंदोलन और शेख हसीना सरकार के पतन के बाद यह देश का पहला बड़ा लोकतांत्रिक चुनाव है। 127 मिलियन (12.7 करोड़) मतदाता न केवल नई सरकार चुनेंगे, बल्कि देश के भविष्य का रोडमैप भी तय करेंगे।
शेख हसीना की पार्टी बैन, तारिक रहमान की दावेदारी मजबूत
अगस्त 2024 में हुए सत्ता परिवर्तन के बाद अवामी लीग को इन चुनावों से प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस समय मुख्य मुकाबला खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी गठबंधन के बीच माना जा रहा है। 17 साल बाद स्वदेश लौटे तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद की रेस में सबसे आगे देखा जा रहा है। उन्होंने कानून-व्यवस्था, रोजगार और अभिव्यक्ति की आजादी जैसे वादों के साथ जनता का भरोसा जीतने की कोशिश की है।
84-पॉइंट रिफॉर्म और ‘जुलाई चार्टर’ पर जनमत संग्रह
यह चुनाव केवल सत्ता बदलने के लिए नहीं, बल्कि संवैधानिक सुधारों के लिए भी महत्वपूर्ण है। मतदाता ‘जुलाई चार्टर’ पर भी अपनी राय दे रहे हैं। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो अगली सरकार को बांग्लादेश के संविधान और लोकतांत्रिक ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन करने का अधिकार मिल जाएगा। यह मुख्य रूप से मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार द्वारा प्रस्तावित 84-पॉइंट रिफॉर्म पैकेज पर एक रेफरेंडम की तरह है।
प्रवासियों को पहली बार मिला पोस्टल बैलेट का अधिकार
लोकतंत्र को समावेशी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, चुनाव आयोग ने लगभग 8 लाख प्रवासी बांग्लादेशियों को IT-इनेबल्ड पोस्टल बैलेट सिस्टम के जरिए वोट डालने की सुविधा दी है। ढाका के मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जहाँ नागरिक 17-18 साल बाद खुलकर मतदान करने को लेकर उत्साहित हैं।
भारत और वैश्विक समुदाय के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?
- भारत-बांग्लादेश संबंध: नई सरकार के गठन से सीमा सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और आतंकवाद विरोधी सहयोग पर गहरा असर पड़ेगा।
- आर्थिक स्थिरता: महंगाई और विदेशी कर्ज से जूझ रहे बांग्लादेश के लिए एक स्थिर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार जरूरी है।
- क्षेत्रीय भू-राजनीति: दक्षिण-पूर्व एशिया में बांग्लादेश की रणनीतिक स्थिति इसे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाती है।
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ब्रेकिंग…
बांग्लादेश में मतदान से पहले एक और हिंदू युवक की हत्या, चाय बागान में मिली हाथ-पैर बंधी लाश

बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय को फिर निशाना बनाया गया है। कमलगंज में एक चाय बागान से 28 साल के हिंदू युवक रतन साहूकार की लाश बरामद हुई। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि उसके हाथ-पैर बंधे हुए थे और शरीर पर गंभीर चोट के निशान थे। लोगों ने सुबह 10 बजे चंपारा चाय बागान में रतन की लाश देखी और तुरंत पुलिस को सूचना दी। लाश खून से लथपथ थी और शरीर पर कई जगह चोट के गहरे निशान थे। कमलगंज पुलिस स्टेशन के इंचार्ज अब्दुल अवाल ने पुष्टि की कि मृतक रतन साहूकार था, जो इसी बागान में काम करता था और इस्लामपुर यूनियन से जुड़ा हुआ था।