भोपाल: मध्य प्रदेश के किसानों की किस्मत बदलने के लिए मोहन यादव सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ (Krishak Kalyan Varsh) के रूप में मनाने का संकल्प लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय को दोगुना करना और कृषि व्यवस्था को सीधे खेत-खलिहानों से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि इस विशेष वर्ष के दौरान सरकार केवल मंत्रालय से नहीं, बल्कि सीधे किसानों के बीच जाकर काम करेगी। इसके लिए मालवा से लेकर विंध्य तक विशेष ‘कृषि कैबिनेट’ का आयोजन किया जाएगा।
चार अंचलों में सजेगी ‘कृषि कैबिनेट’
सरकार ने तय किया है कि कृषि से जुड़े बड़े फैसले अब बंद कमरों के बजाय सीधे उन क्षेत्रों में लिए जाएंगे जहाँ खेती मुख्य आधार है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के इन चार प्रमुख अंचलों में कृषि कैबिनेट आयोजित की जाएगी:
- मालवा और निमाड़: यहाँ सोयाबीन, कपास और बागवानी फसलों पर फोकस रहेगा।
- चंबल: सरसों और बाजरा उत्पादक किसानों की समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट समाधान होगा।
- विंध्य: धान और अन्य पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सिंचाई परियोजनाओं पर चर्चा होगी।
क्यों खास है 2026 ‘कृषक कल्याण वर्ष’?
इस अभियान का मकसद केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि धरातल पर बदलाव लाना है। सरकार का मुख्य ध्यान इन बिंदुओं पर रहेगा:
- आय दोगुनी करना: आधुनिक तकनीक और बेहतर बीज उपलब्ध कराकर लागत घटाना और मुनाफा बढ़ाना।
- सीधा संवाद: कैबिनेट के माध्यम से किसान अपनी समस्याओं को सीधे मंत्रियों और अधिकारियों के सामने रख सकेंगे।
- बाजार से जुड़ाव: किसानों के उत्पादों को सही दाम और अंतरराष्ट्रीय बाजार दिलाने के लिए नई नीतियां बनाना।
किसान और आम जनता पर क्या होगा असर?
इस पहल से मध्य प्रदेश के कृषि परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव की उम्मीद है। जब कैबिनेट खुद अंचलों में जाएगी, तो योजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली देरी खत्म होगी।
नई सिंचाई परियोजनाओं की मंजूरी, खाद-बीज की उपलब्धता और मुआवजे जैसे मुद्दों पर त्वरित फैसले हो सकेंगे। इससे न केवल किसान आर्थिक रूप से सशक्त होंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष: खेती को लाभ का धंधा बनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह कदम ‘खेती को लाभ का धंधा’ बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के माध्यम से सरकार किसानों के प्रति अपनी जवाबदेही तय कर रही है। अब देखना यह होगा कि इन कृषि कैबिनेट बैठकों से किसानों की झोली में कितनी खुशहाली आती है।
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