सड़न सिस्टम में है या संवेदनाओं में? भागीरथपुरा की चीख और विपक्ष का सरेंडर

सड़न सिस्टम में है या संवेदनाओं में? भागीरथपुरा की चीख और विपक्ष का सरेंडर

अजय तिवारी, संपादक BDC News

इंदौर का भागीरथपुरा आज एक मोहल्ला नहीं, बल्कि सिस्टम की सड़न का कब्रिस्तान बन चुका है। 17 इंसानी जिंदगियां सीवेज मिश्रित पानी की भेंट चढ़ गईं, लेकिन अफसोस कि इस भयावह त्रासदी ने भी प्रदेश के ‘दिग्गज’ विपक्षी नेताओं की नींद नहीं तोड़ी। राजनीति की बिसात पर खुद को जनता का मसीहा कहने वाले दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे चेहरे मौके से नदारद हैं। जनता जब मौत से लड़ रही थी, तब कांग्रेस के ये सूरमा ‘एक्स’ (ट्विटर) पर संवेदनाओं के कैप्सूल बेच रहे थे।

सवाल यह है कि क्या अब विपक्ष की भूमिका केवल स्मार्ट फोन की स्क्रीन तक सिमट गई है? छिंदवाड़ा में 24 बच्चों की मौत हो या इंदौर का यह ताज़ा नरसंहार, कांग्रेस का रवैया ‘पिकनिक पॉलिटिक्स’ जैसा नज़र आता है—घटना के कई दिनों बाद जागना और फिर एक तारीख देकर रस्म अदायगी कर लेना। जब सत्तापक्ष अपनी ही अंतर्कलह में उलझा हो, तब विपक्ष का यह सरेंडर लोकतंत्र के लिए किसी त्रासदी से कम नहीं है।

भागीरथपुरा की तंग गलियों में आज सन्नाटा नहीं, बल्कि एक चीखने वाला आक्रोश है। यहाँ की हवाओं में अभी भी उन 17 लोगों की चिताओं का धुआं है, जिन्होंने नगर निगम की लापरवाही और ‘जहरीली’ पाइपलाइन के कारण दम तोड़ दिया। ग्राउंड जीरो पर स्थिति यह है कि 15 जगहों पर खुदाई के बाद सात बड़े लीकेज मिले हैं, जो चीख-चीख कर कह रहे हैं कि यह मौत प्राकृतिक नहीं, बल्कि ‘प्रशासनिक हत्या’ है। लेकिन इस मानवीय त्रासदी के बीच सियासत का एक और डरावना चेहरा सामने आया है। इंदौर के इस जख्म पर मरहम लगाने के बजाय कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व ‘डिजिटल सक्रियता’ में मशगूल है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी घटना के कई दिनों बाद सक्रिय हुए हैं और 11 जनवरी के आंदोलन की ‘डेडलाइन’ थमा दी है। हैरानी की बात यह है कि जब शहर में हाहाकार मचा था, तब दिग्गज नेता अपने निजी कार्यक्रमों और मनरेगा चौपालों में व्यस्त थे।

सत्तापक्ष (भाजपा) में तो उमा भारती और स्थानीय नेताओं के बीच की अंतर्कलह ने ही विपक्ष का काम कर दिया, वरना कांग्रेस की सुस्ती ने तो सरकार को क्लीन चिट देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। भागीरथपुरा के लोग आज सवाल पूछ रहे हैं “जब हमारे बच्चे तड़प रहे थे, तब नेता प्रतिपक्ष के ट्वीट हमारे काम क्यों नहीं आए?”

यह भी पढ़ें…

इंदौर भागीरथपुरा कांड : सरकारी लैब में ‘जहर’ तो प्राइवेट में ‘अमृत’! बड़े सवाल
देवास एसडीएम सस्पेंड: मंत्री विजयवर्गीय के ‘घंटा’ बयान का सरकारी आदेश में जिक्र पड़ा भारी, सहायक पर भी गिरी गाज

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *