Headlines

    दमोह में है 11वीं शताब्दी का प्राचीन शिव मंदिर… जानें दिलचस्प कहानी

    दमोह में है 11वीं शताब्दी का प्राचीन शिव मंदिर… जानें दिलचस्प कहानी
    👁️ 231 Views

    दमोह. रंजीत अहिरवार
    मध्य प्रदेश के दमोह जिला मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर दूर तेंदूखेड़ा तहसील के अंतर्गत स्थित कोड़ल ग्राम में प्राचीन शिव मंदिर स्थित है. इसका निर्माण ग्यारहवीं शताब्दी पूर्व किया गया था जो लोगों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. एक किवदंती यह भी है कि कुछ लोग इसे चंदेलवंशी मानते हैं. इस शिव मंदिर को कोहलेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. मंदिर की कलाकृतियां अनोखी हैं.
    विश्व प्रसिद्ध खजुराहो की तरह इस मंदिर के चारों तरफ पत्थरों पर अद्भुत कलाकृति की नक्काशी की गई है. यह शिव मंदिर सांस्कृतिक एवं पुरातत्व की अमूल्य धरोहर है. यहां प्रत्येक सोमवार, महाशिवरात्रि और श्रावण मास में भक्त दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं. साथ ही, श्रद्धालु अपनी मुराद पूरी होने पर महाशिवरात्रि महापर्व पर काली मिट्टी से शिवलिंग का निर्माण कर कुएं, बावड़ी और नदी में इन शिविलिंग को विसर्जित करते हैं.
    स मंदिर से जुड़ी हुई ऐसी बहुत सी कहानियां हैं जिन्हें सुनकर लोग चकित रह जाते हैं. गांव के पुराने बुजुर्ग सुनी हुई मंदिर से जुड़ी हुई कहानियां के बारे में बताते हैं कि कई वर्ष पहले रातों रात ऐसा चमत्कार हुआ कि एक पत्थर की चट्टान ने मंदिर का रूप ले लिया. वहीं, कुछ लोग इस मंदिर के निर्माण की कहानी बोना चोर से जोड़ते हैं. बहरहाल मंदिर के निर्माण को लेकर किसी के पास कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है.
    स्थानीय निवासी हललू ने बताया कि यह 11वीं शताब्दी का मंदिर है जो एक रात में बनकर तैयार हुआ था. ऐसी कहानी हमने अपने बुजुर्गों ने सुनी थी. कोड़ल शिव मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार पश्चिम दिशा की ओर है. पूरा मंदिर पत्थरों का बना हुआ है. मंदिर की बाहरी दीवार पर नवग्रह, माता पार्वती और भगवान शिव की प्रतिमा बनी हुई है. वर्तमान में मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी पुरातात्विक विभाग की है इसलिए यहां कोई पुजारी नहीं है.
    भोपाल डॉट कॉम

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *