आध्यात्मिक डेस्क (BhopalOnline | BDC News ): साल 2026 की शुरुआत एक बहुत ही दुर्लभ और जटिल संयोग के साथ हो रही है। Makar Sankranti 2026 को लेकर देशभर के पंडितों और ज्योतिषियों में एक विशेष चर्चा है। चर्चा का विषय यह है कि क्या इस बार संक्रांति पर परंपरागत ‘खिचड़ी’ बनाई जाएगी या नहीं?
इस उलझन की सबसे बड़ी वजह है ‘षट्तिला एकादशी’। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल मकर संक्रांति और एकादशी का संयोग एक ही समय के आस-पास बन रहा है, जिससे चावल के दान और खिचड़ी के सेवन को लेकर शास्त्रों के नियम बदल गए हैं।
मकर संक्रांति 2026 और एकादशी संयोग – शास्त्रीय विश्लेषण
1. Makar Sankranti 2026 और षट्तिला एकादशी का दुर्लभ संयोग
साल 2026 में 14 जनवरी को षट्तिला एकादशी है। शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन चावल का सेवन और दान करना वर्जित माना गया है।
- शास्त्र क्या कहते हैं? ‘एकादश्यां न भुञ्जीत पक्षयोरुभयोरपि’ अर्थात दोनों पक्षों की एकादशी को अन्न (विशेषकर चावल) का त्याग करना चाहिए।
- संक्रांति का समय: सूर्य 14 जनवरी की रात को मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को होगा।
- उलझन: चूंकि 14 तारीख को एकादशी है, इसलिए उस दिन खिचड़ी (चावल) का दान और सेवन पूरी तरह वर्जित रहेगा।
2. एकादशी पर चावल का दान क्यों नहीं करते?
पंडितों और शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन चावल में ‘महर्षि मेधा’ का अंश माना जाता है।
- धार्मिक मान्यता: एकादशी पर चावल खाना जीव हत्या के समान माना गया है।
- खिचड़ी पर संकट: मकर संक्रांति का मुख्य प्रसाद ‘खिचड़ी’ है, जिसका मुख्य आधार चावल है। एकादशी होने के कारण 14 जनवरी को खिचड़ी बनाना शास्त्रों के विरुद्ध होगा।
3. तो क्या इस बार खिचड़ी नहीं बनेगी? पंडितों का समाधान
अगर आप सोच रहे हैं कि इस बार मकर संक्रांति बिना खिचड़ी के बीतेगी, तो रुकिए! ज्योतिषियों ने इसका एक स्पष्ट समाधान दिया है:
- 14 जनवरी (षट्तिला एकादशी): इस दिन केवल तिल का दान और तिल का ही सेवन करें। चूंकि यह षट्तिला एकादशी है, इसलिए 6 प्रकार के तिल के प्रयोग का महत्व है। इस दिन भूलकर भी खिचड़ी न बनाएं।
- 15 जनवरी (मकर संक्रांति पुण्यकाल): 15 जनवरी को एकादशी समाप्त होने के बाद (पारण के समय) आप खिचड़ी बना सकते हैं, दान कर सकते हैं और खा सकते हैं।
- निष्कर्ष: संक्रांति का मुख्य उत्सव और खिचड़ी भोज इस बार 15 जनवरी को ही शास्त्र सम्मत होगा।
4. Makar Sankranti 2026: क्या दान करें और क्या नहीं?
चूंकि इस बार एकादशी और संक्रांति साथ हैं, इसलिए दान की सूची में सावधानी बरतें:
- 14 जनवरी को क्या दान करें: केवल तिल, गुड़, गरम कपड़े और जल। चावल या खिचड़ी का दान इस दिन न करें।
- 15 जनवरी को क्या दान करें: इस दिन आप ‘खिचड़ी’ का दान कर सकते हैं। यह दिन संक्रांति के दान के लिए सर्वश्रेष्ठ रहेगा।
5. षट्तिला एकादशी का महत्व और संक्रांति का वाहन
मकर संक्रांति 2026 का वाहन और षट्तिला एकादशी का मेल इस वर्ष को आध्यात्मिक रूप से बहुत शक्तिशाली बना रहा है। षट्तिला एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा और तिल के स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है, वहीं संक्रांति पर सूर्य की उपासना से आरोग्य मिलता है।
FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 14 जनवरी 2026 को खिचड़ी क्यों नहीं खानी चाहिए?
उत्तर: क्योंकि 14 जनवरी को षट्तिला एकादशी है और शास्त्रानुसार एकादशी के दिन चावल (अन्न) का सेवन वर्जित है।
प्रश्न 2: Makar Sankranti 2026 का दान किस दिन करना श्रेष्ठ है?
उत्तर: तिल का दान 14 और 15 दोनों दिन किया जा सकता है, लेकिन खिचड़ी और अन्न का दान 15 जनवरी को करना ही शास्त्र सम्मत है।
प्रश्न 3: क्या संक्रांति और एकादशी का एक साथ होना अशुभ है?
उत्तर: नहीं, यह एक अत्यंत शुभ संयोग है। एकादशी व्रत से मन की शुद्धि होती है और संक्रांति से सूर्य की नई ऊर्जा प्राप्त होती है। बस नियमों का पालन करना जरूरी है।
प्रश्न 4:2026 में मकर संक्रांति कब है?
संक्रांति क्षण (सूर्य का गोचर): दोपहर 03:13 बजे (14 जनवरी)
निष्कर्ष (Conclusion)
संक्षेप में, Makar Sankranti 2026 पर खिचड़ी न बनने की बात केवल 14 जनवरी (एकादशी) के लिए है। शास्त्रों की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए, इस बार खिचड़ी का त्यौहार 15 जनवरी को मनाया जाना चाहिए। एकादशी के दिन चावल के निषेध का पालन करें और अगले दिन पूरे हर्षोल्लास के साथ खिचड़ी का पर्व मनाएं।
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