धर्म डेस्क. BDC News/bhopalonline.org
आज के भागदौड़ भरे जीवन में मानसिक शांति और पापों से मुक्ति के लिए एकादशी का व्रत एक संजीवनी के समान माना जाता है। भोपाल के मंदिरों और घरों में आज जया एकादशी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को नीच योनि (जैसे भूत-प्रेत या पिशाच योनि) से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
भोपाल के लिए जया एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त (Puja Muhurat)
भोपाल के स्थानीय समयानुसार, व्रत के मुख्य मुहूर्त
- एकादशी तिथि प्रारंभ: 28 जनवरी 2026, शाम 04:35 बजे से।
- एकादशी तिथि समाप्त: 29 जनवरी 2026, दोपहर 01:55 बजे तक।
- उदयातिथि के अनुसार व्रत: गुरुवार, 29 जनवरी 2026।
- अभिजीत मुहूर्त (पूजा के लिए श्रेष्ठ): दोपहर 12:13 से 12:56 तक।
व्रत पारण का समय (Bhopal Parana Timing)
व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब पारण (व्रत खोलना) सही समय पर किया जाए। भोपाल के भक्त अगले दिन यानी 30 जनवरी 2026 को व्रत खोलें।
- पारण का शुभ समय: सुबह 07:10 बजे से 09:20 बजे के बीच।
जया एकादशी व्रत कथा: पिशाच योनि से मुक्ति की पौराणिक कहानी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार देवराज इंद्र की सभा में उत्सव चल रहा था। वहां माल्यवान नाम का एक गंधर्व मधुर गायन कर रहा था और पुष्पवती नाम की अप्सरा नृत्य कर रही थी।
गायन के दौरान माल्यवान और पुष्पवती एक-दूसरे के प्रति आकर्षित हो गए। इस मोह के कारण माल्यवान का सुर और ताल बिगड़ गया। इंद्र देव इसे अपना अपमान समझकर क्रोधित हो गए। उन्होंने दोनों को श्राप दे दिया कि वे स्वर्ग से निष्कासित होकर मृत्यु लोक में पिशाच का जीवन बिताएंगे।
हिमालय की कड़ाके की ठंड और अनजाने में हुआ व्रत
श्राप के कारण दोनों हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों पर पिशाच बनकर रहने लगे। वहां उन्हें न भोजन मिलता था, न चैन। माघ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन ठंड इतनी अधिक थी कि उन्होंने पूरे दिन कुछ नहीं खाया और रात भर जागते रहे। अनजाने में उनसे जया एकादशी का उपवास और रात्रि जागरण हो गया।
श्राप से मुक्ति और स्वर्ग वापसी
भगवान विष्णु उनकी इस अनजानी भक्ति से प्रसन्न हुए। अगले दिन सुबह होते ही दोनों की पिशाच देह छूट गई और उन्हें पुनः दिव्य स्वरूप प्राप्त हुआ। जब वे स्वर्ग लौटे, तो इंद्र भी चकित रह गए। तब उन्हें पता चला कि यह जया एकादशी के व्रत का प्रताप था।
भोपाल में कैसे करें पूजा? (Puja Vidhi & Tips)
भोपाल के प्रसिद्ध बिड़ला मंदिर और इस्कॉन मंदिर में आज के दिन विशेष भीड़ रहती है। यदि आप घर पर पूजा कर रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
- संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- श्री हरि का अभिषेक: भगवान विष्णु की मूर्ति को गंगाजल या पंचामृत से स्नान कराएं।
- पीला रंग: भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले फल और पीले वस्त्र अर्पित करें।
- तुलसी का महत्व: विष्णु जी को भोग लगाते समय तुलसी दल (पत्ता) अवश्य रखें, क्योंकि इसके बिना वे भोग स्वीकार नहीं करते।
- दीपक: शाम को तुलसी के पास और घर के मंदिर में शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
क्या न करें?
- इस दिन चावल का सेवन वर्जित है।
- किसी की निंदा न करें और सात्विक विचार रखें।
- नाखून, बाल या दाढ़ी काटना आज के दिन अशुभ माना जाता है।
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श्रद्धा ही सर्वोपरि है
जया एकादशी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह आत्म-अनुशासन का पाठ पढ़ाती है। भोपाल के भक्त इस दिन दान-पुण्य करके और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करके विशेष आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
यदि आप भोपाल में रहते हैं, तो दान के लिए स्थानीय मंदिरों जैसे भोजपुर, गुफा मंदिर या खटलापुरा मंदिर जा सकते हैं।