भोपाल. BDC News
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) का NAAC मूल्यांकन अब एक बड़े अकादमिक विवाद में बदल चुका है, जिसके केंद्र में विश्वविद्यालय को मिला A++ ग्रेड है। इन आरोपों के चलते, गुरुवार शाम 6 बजे RGPV के कुलगुरु (Vice-Chancellor) प्रो. राजीव त्रिपाठी ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राज्यपाल को सौंप दिया है।
यह घटनाक्रम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद सामने आया है। ABVP का दावा है कि विश्वविद्यालय ने NAAC का सर्वोच्च A++ ग्रेड हासिल करने के लिए अपनी स्व-अध्ययन रिपोर्ट (SSR) में कई गलत और भ्रामक तथ्य प्रस्तुत किए हैं, जो प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
ABVP का प्रदर्शन और ‘SSR फ़र्ज़ीवाड़े’ के आरोप
गुरुवार को दोपहर दो बजे से ABVP के कार्यकर्ता कुलपति के कक्ष के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। ABVP के कार्यकर्ता शिवम जाट ने जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा NAAC के लिए अपलोड की गई SSR रिपोर्ट में 22 गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।
प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी ने इस पूरे मामले को “अकादमिक भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण” करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह SSR रिपोर्ट NAAC टीम के आने से पहले सार्वजनिक की जानी थी, लेकिन इसे 17 नवंबर को अचानक अपलोड किया गया, जिससे इसकी सत्यता और पारदर्शिता संदेह के घेरे में आ गई है।
ABVP की तीन प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय की प्रशासनिक और अकादमिक शुचिता सुनिश्चित करने के लिए तीन बड़ी मांगें रखी हैं:
- SSR फ़र्ज़ीवाड़े में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों, जिसमें कुलपति भी शामिल हो सकते हैं, पर तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
- RGPV में प्रशासनिक क्षमता में सुधार के लिए तत्काल धारा 54 लागू की जाए।
- विश्वविद्यालय को तीन क्षेत्रों में विभाजित किया जाए ताकि प्रशासनिक दक्षता बढ़ाई जा सके।
मंत्री से मुलाकात: FIR और स्वतंत्र जांच की मांग
आरोपों को प्रमाणित करने के उद्देश्य से, मंगलवार को ABVP प्रतिनिधिमंडल ने प्रांत मंत्री केतन चतुर्वेदी के नेतृत्व में तकनीकी एवं उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को SSR रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं से जुड़े साक्ष्य सौंपे और कुलपति सहित संबंधित दोषियों पर तुरंत FIR दर्ज करने, परिसर में धारा 54 लागू करने और NAAC मूल्यांकन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग दोहराई।
प्रो. त्रिपाठी का इस्तीफा इस बढ़ते अकादमिक विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, और अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है कि वह ABVP की मांगों और NAAC मूल्यांकन में हुई कथित अनियमितताओं पर क्या कदम उठाती है।