कलकत्ता. BDC News
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा दायर उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें IPAC के आईटी हेड प्रतीक जैन के दफ्तर पर हुई ED की छापेमारी को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब जांच एजेंसी ने किसी भी जब्ती से इनकार कर दिया है, तो अब इस मामले में सुनवाई का कोई ठोस आधार नहीं बचता।
ED का बड़ा दावा: ‘फाइलें हम नहीं, ममता बनर्जी ले गईं’
सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) राजू ने चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि एजेंसी ने रेड के दौरान कोई दस्तावेज जब्त नहीं किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद मौके पर पहुंचकर गैरकानूनी तरीके से फाइलें अपने कब्जे में ली थीं। ED ने तर्क दिया कि ममता बनर्जी ने निजी तौर पर हस्तक्षेप किया, इसलिए उन्हें इस मामले में पक्षकार बनाया जाना चाहिए था।
TMC की दलील: ‘डेटा सुरक्षा और राजनीतिक दबाव का डर’
TMC की ओर से वकील गुरुस्वामी ने तर्क दिया कि पार्टी का पिछले 6 वर्षों का राजनीतिक डेटा सुरक्षित रहना चाहिए। उनका कहना था कि चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक सलाहकार के ऑफिस पर छापेमारी करना केवल डराने और दबाव बनाने की रणनीति है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि याचिका का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक डेटा की सुरक्षा था, और जब एजेंसी कह रही है कि कुछ जब्त ही नहीं हुआ, तो याचिका का औचित्य खत्म हो जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक टली अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी के खिलाफ ED द्वारा दाखिल याचिका पर फिलहाल सुनवाई टाल दी है। कोर्ट ने संज्ञान लिया कि इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में ‘विशेष अनुमति याचिका’ (SLP) पहले से ही लंबित है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद ही इस मामले पर आगे विचार किया जाएगा। 8 जनवरी को हुई इस रेड के दौरान ममता बनर्जी खुद IPAC डायरेक्टर के घर पहुंची थीं, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं।
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