अजय तिवारी. BDC NEWS
‘कृषक कल्याण वर्ष’: मध्यप्रदेश ने एक बार फिर देश के सामने ‘कृषि-प्रधान’ होने का वास्तविक अर्थ प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में समर्पित करना इस बात का प्रमाण है कि राज्य की समृद्धि का मार्ग खेतों की पगडंडियों से होकर ही गुजरता है। यह पहल इसलिए भी अभूतपूर्व है क्योंकि इसमें केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि 16 विभागों का एक साझा ‘रोडमैप’ और 10 स्पष्ट संकल्प दिखाई देते हैं।
तकनीक और नवाचार का समावेश
सरकार का यह संकल्प कि अगले तीन वर्षों में 30 लाख किसानों को सोलर पंप दिए जाएंगे, अत्यंत दूरदर्शी है। यह न केवल किसानों को बिजली संकट से मुक्ति दिलाएगा, बल्कि उन्हें ‘अन्नदाता’ के साथ-साथ ‘ऊर्जादाता’ की नई पहचान भी देगा। इसके अलावा, फसल नुकसानी का आधुनिक तकनीक (ड्रोन/सैटेलाइट) से सर्वे और ‘ई-विकास’ पोर्टल का शुभारंभ यह सुनिश्चित करेगा कि सरकारी मदद में पारदर्शिता आए और किसानों को मिलने वाली सहायता में देरी न हो।
बाजार और उद्योग से जुड़ाव
अक्सर देखा गया है कि बंपर पैदावार के बावजूद किसान अपनी उपज का सही मूल्य नहीं पा पाता। इस दिशा में सरसों को भावांतर योजना में शामिल करना और डिंडोरी में ‘श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र’ की स्थापना जैसे कदम मील का पत्थर साबित होंगे। ‘खेत से फैक्ट्री’ का विजन और खाद प्रसंस्करण (Food Processing) इकाइयों के लिए सब्सिडी देना यह दर्शाता है कि सरकार अब किसान को केवल उत्पादक नहीं, बल्कि एक उद्यमी के रूप में देख रही है।
एक समन्वित प्रयास की आवश्यकता
इस महत्वाकांक्षी योजना की सफलता का सारा दारोमदार इसके क्रियान्वयन पर टिका है। मुख्यमंत्री ने 16 विभागों के समन्वय की बात कही है, जो एक कठिन लेकिन अनिवार्य प्रक्रिया है। यदि सिंचाई का दायरा 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने और शून्य प्रतिशत ब्याज जैसी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के किसान तक समयबद्ध तरीके से पहुँचता है, तो निस्संदेह मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर देश के लिए एक नजीर बनी रहेगी।
कृषक कल्याण वर्ष 2026 मध्यप्रदेश के किसानों के लिए वैभव और समृद्धि का द्वार खोल सकता है। मुख्यमंत्री के शब्दों में “जिसका तिलक खेत की मिट्टी है, वही मध्यप्रदेश का किसान है”—इस भावना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन और किसान दोनों को ‘संकल्प से सिद्धि’ के इस महायज्ञ में मिलकर आहुति देनी होगी।