भोपाल| BDC News|bhopalonline.org
मध्य प्रदेश विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष के पद से हेमंत कटारे कk अचानक इस्तीफा.. इस्तीफे के बाद जारी कयास और फोन बंद होने की चर्चा पर कटारे ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी चुप्पी तोड़ी है। वहीं, दूसरी ओर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि इस हाई-प्रोफाइल इस्तीफे पर अंतिम निर्णय केवल दिल्ली दरबार ही लेगा।
“पद मोह नहीं, विरासत का मान”: हेमंत
इस्तीफे के बाद उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए हेमंत कटारे ने सोशल मीडिया पर एक भावुक और आक्रामक पोस्ट साझा किया। उन्होंने लिखा कि कांग्रेस पार्टी उनके स्वर्गीय पिता की विरासत है और वे इसके प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। उन्होंने फोन बंद होने की खबरों पर तंज कसते हुए कहा कि शादी की सालगिरह पर परिवार को समय देना कोई साजिश नहीं, बल्कि एक मानवीय अधिकार है।
कटारे ने स्पष्ट संदेश देते हुए लिखा, “मैं पद से नहीं, जनता के विश्वास से ताकत लेता हूं।” उन्होंने आगामी रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि वे सोमवार से सदन में दोगुनी ऊर्जा और पुख्ता दस्तावेजों के साथ लौटेंगे और सरकार को गोमांस, जहरीली दवा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर घेरेंगे।
जीतू पटवारी का समर्थन और हरीश चौधरी की दो-टूक
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कटारे के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि उनके ट्वीट ने सब कुछ स्पष्ट कर दिया है।
प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने इस मामले को पार्टी का आंतरिक हिस्सा बताया। भास्कर से चर्चा के दौरान चौधरी ने महत्वपूर्ण कानूनी और संगठनात्मक पहलू स्पष्ट किया।
जाने क्या कहा हरीश चौधरी ने-
- हेमंत कटारे की नियुक्ति अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की थी, इसलिए उनका इस्तीफा स्वीकार करने या न करने का अधिकार भी केवल राष्ट्रीय अध्यक्ष को ही है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर बातचीत जारी है और हर आंतरिक प्रक्रिया को सार्वजनिक करना संभव नहीं है। कटारे वरिष्ठ नेता हैं और उनके साथ हाईकमान का सीधा संवाद रहता है।
सरकार को घेरने का नया प्लान
भले ही हेमंत कटारे ने पद से इस्तीफे की पेशकश की हो, लेकिन उनके तेवरों से साफ है कि वे विपक्ष में अपनी भूमिका और आक्रामक करने वाले हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में स्पष्ट किया कि इंदौर के भागीरथपुरा मामले, और प्रदूषित हवा-पानी जैसे जनहित के मुद्दों पर वे सरकार की जवाबदेही तय करेंगे। कांग्रेस के भीतर चल रहा यह ‘इस्तीफा कांड’ अब राष्ट्रीय नेतृत्व के पाले में है, जिसका निर्णय मध्य प्रदेश कांग्रेस की भविष्य की दिशा तय करेगा।
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