भोपाल: राजधानी में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंगलवार को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने अधिकारियों को कड़े तेवर दिखाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्भवती महिलाओं और नवजातों की देखभाल में किसी भी स्तर पर चूक हुई, तो सीधे कार्रवाई होगी।
लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही
बैठक के दौरान कलेक्टर ने मातृ मृत्यु (Maternal Death) के मामलों पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि हर एक केस की बारीकी से समीक्षा की जाए। जिन कर्मचारियों या डॉक्टरों की लापरवाही सामने आएगी, उन पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।
उनका मुख्य फोकस इन बिंदुओं पर रहा:
- गर्भवती महिलाओं का समय पर रजिस्ट्रेशन (ANC Registration)।
- हाई-रिस्क (जोखिम वाली) गर्भवती महिलाओं की पहचान।
- समय पर रेफरल सुविधा और सुरक्षित प्रसव।
बुजुर्गों के लिए खुशखबरी: आयुष्मान कार्ड का चलेगा विशेष अभियान
बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती इला तिवारी ने एक बड़ा निर्देश दिया। अब 70 साल से अधिक उम्र के हर बुजुर्ग का आयुष्मान कार्ड (Ayushman Card) बनाया जाएगा। इसके लिए पंचायत स्तर पर डेटा जुटाकर एक बड़ा अभियान शुरू किया जा रहा है।
बैठक की अन्य मुख्य बातें:
- डिजिटल हेल्थ: भोपाल में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 600 से अधिक निजी और 32 सरकारी अस्पताल डिजिटल मिशन से जुड़ चुके हैं।
- बीमारियों पर लगाम: टीबी, कुष्ठ और वेक्टर जनित (डेंगू-मलेरिया) रोगों के नियंत्रण की समीक्षा की गई।
- पेमेंट में तेजी: जननी सुरक्षा और मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना का पैसा लाभार्थियों को तुरंत देने के निर्देश दिए गए।
30 जनवरी से ‘स्पर्श’ अभियान की शुरुआत
कुष्ठ रोग को जड़ से मिटाने के लिए जिले में 30 जनवरी से ‘स्पर्श जागरूकता अभियान’ शुरू होने जा रहा है। इसके जरिए लोगों को कुष्ठ रोग के लक्षणों और इलाज के प्रति जागरूक किया जाएगा। साथ ही, जलवायु परिवर्तन का सेहत पर पड़ने वाले असर को लेकर भी विभाग मिलकर काम करेंगे।
आम जनता के लिए यह क्यों जरूरी है?
कलेक्टर के इन कड़े निर्देशों का सीधा असर आम नागरिकों, खासकर ग्रामीण इलाकों की महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ेगा। सरकारी योजनाओं का लाभ अब बिना किसी देरी के सीधे उनके खातों में पहुंचेगा। साथ ही, अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिलेगा।
निष्कर्ष: सुधरेंगे जमीनी हालात
प्रशासन की इस सक्रियता से यह साफ है कि भोपाल अब स्वास्थ्य के मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चल रहा है। अगर योजनाओं का क्रियान्वयन जमीन पर सही ढंग से हुआ, तो जिले में मातृ और शिशु मृत्यु दर में बड़ी कमी आ सकती है।
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