भोपाल | 5 फरवरी 2026 MP में आयुष चिकित्सा शिक्षा का विस्तार (Expansion of AYUSH Medical Education) अब नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
राज्य सरकार ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देते हुए पिछले 2 वर्षों में प्रदेश को बड़ी सौगात दी है। सोशल मीडिया (X.com) पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, एमपी में आयुष नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 8 नए आयुर्वेद महाविद्यालयों को स्वीकृति मिल चुकी है।
2 साल और 8 नए कॉलेज: आयुष विभाग की बड़ी उपलब्धि
मध्य प्रदेश में प्राकृतिक और प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों की ओर युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ा है। इसे देखते हुए आयुष विभाग ने बुनियादी ढांचे पर फोकस किया है। पिछले 24 महीनों के भीतर मिली इन 8 नई मंजूरियों ने राज्य के चिकित्सा इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
- बढ़ेंगी सीटें: नए कॉलेजों के खुलने से बीएएमएस (BAMS) की सीटों में भारी इजाफा होगा।
- स्थानीय स्तर पर सुविधाएं: दूर-दराज के जिलों के छात्रों को अब आयुर्वेद की पढ़ाई के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
- रोजगार के अवसर: इन कॉलेजों के संचालन से शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक क्षेत्रों में नौकरियों के नए द्वार खुलेंगे।
क्यों जरूरी है आयुष शिक्षा का यह विस्तार?
कोरोना काल के बाद दुनिया का भरोसा आयुर्वेद और योग पर बढ़ा है। मध्य प्रदेश, जो पहले से ही जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक संसाधनों का गढ़ है, अब आयुष शिक्षा का केंद्र (Education Hub) बनने की ओर अग्रसर है।
जनता के लिए यह इसलिए जरूरी है क्योंकि अधिक कॉलेज होने का मतलब है अधिक डॉक्टर। इससे न केवल शिक्षा बेहतर होगी, बल्कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में आयुष डॉक्टरों की भागीदारी भी बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण इलाकों में इलाज सुलभ होगा।
छात्रों और आम जनता पर असर
- सस्ते इलाज की पहुंच: आयुर्वेद अस्पतालों की संख्या बढ़ने से आम जनता को सस्ता और जड़ से बीमारी खत्म करने वाला इलाज मिलेगा।
- करियर के विकल्प: मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों के पास अब एमबीबीएस के अलावा आयुर्वेद में भी बेहतरीन विकल्प उपलब्ध होंगे।
- रिसर्च को बढ़ावा: नए कॉलेजों में आधुनिक लैब होने से प्राचीन जड़ी-बूटियों पर नए शोध (Research) संभव हो सकेंगे।
आयुष मंत्रालय के इन प्रयासों से मध्य प्रदेश आने वाले समय में ‘मेडिकल टूरिज्म’ के क्षेत्र में भी अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।
उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम
MP में आयुष चिकित्सा शिक्षा का यह विस्तार केवल कॉलेजों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि यह प्रदेश को स्वस्थ बनाने की एक बड़ी मुहिम है। इन 8 नए कॉलेजों के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद, एमपी देश में आयुर्वेद शिक्षा के मामले में अग्रणी राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा।
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