अजय तिवारी, संपादक
18 साल के लंबे इंतजार और जटिल वार्ताओं के बाद, भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर मुहर लगा दी है। 16वें भारत-EU समिट के दौरान हुई यह घोषणा न केवल दोनों क्षेत्रों के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगी, बल्कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में एक मजबूत ध्रुव के रूप में भी उभरेगी।यह समझौता केवल कागजी दस्तावेज नहीं, बल्कि निवेश और रोजगार का एक बड़ा द्वार है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के अनुसार, इस डील से सालाना करीब 43 हजार करोड़ रुपये (4 अरब यूरो) के टैरिफ कम होंगे।
समझौते के तहत, भारत ने यूरोपीय कारों (जैसे बीएमडब्ल्यू) पर लगने वाली 110% की भारी-भरकम इम्पोर्ट ड्यूटी को घटाकर मात्र 10% करने का फैसला किया है। हालांकि, घरेलू उद्योग को बचाने के लिए सालाना 2.5 लाख गाड़ियों की सीमा तय की गई है। हालांकि, जो कारें भारत में ही असेंबल होती हैं, उन पर पहले से कम ड्यूटी है, लेकिन पूरी तरह से तैयार (CBU) होकर आने वाली लग्जरी कारें अब भारतीय ग्राहकों के लिए काफी सस्ती हो जाएंगी। यूरोपीय वाइन और स्पिरिट्स पर फिलहाल 150% टैरिफ लगता है, जिसे घटाकर 20-30% के दायरे में लाया जाएगा। इससे भारतीय बाजार में यूरोपीय प्रीमियम उत्पादों की पहुंच सुगम होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को “साझा समृद्धि का रोडमैप” करार दिया है। उन्होंने जोर दिया कि यह समझौता निवेश और इनोवेशन के साथ-साथ ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEA) को भी गति देगा। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जब तकनीक और खनिजों को ‘हथियार’ के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, तब भारत और EU की यह साझेदारी आत्मनिर्भरता और विश्वसनीय सप्लाई चेन के लिए अनिवार्य है।
समिट में एक खास पल तब आया जब यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने अपना OCI कार्ड दिखाते हुए खुद को ‘प्रवासी भारतीय’ बताया। उनकी गोवा से जुड़ी जड़ों ने इस कूटनीतिक जीत में एक व्यक्तिगत स्पर्श जोड़ दिया। 2027 तक लागू होने वाले इस समझौते से भारत (दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था) और यूरोपीय संघ (दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था) मिलकर वैश्विक GDP का 25% हिस्सा नियंत्रित करेंगे। यह समझौता न केवल व्यापारिक बाधाओं को हटाएगा, बल्कि चीन पर निर्भरता कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा।
भोपाल. BDC News/bhopalonline.org