अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस: युवा शक्ति, शिक्षा प्रणाली और वास्तविकता

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अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस विशेष 24 जनवरी 2026

डॉ. प्रितम भि. गेडाम

पृथ्वी पर मनुष्य के पास शिक्षा एक ऐसा बेशकीमती मौका है, जो जीवन में हर क्षेत्र, हर उच्च पद, काबिलियत और विकास का जरिया बनता है और हर वह मुकाम हासिल करने के लायक जो मनुष्य चाहता है, यह शिक्षा ही दिलाती हैं। इसके साथ ही मनुष्य के सर्वांगीण विकास की जिम्मेदारी भी शिक्षा पर होती है, मनुष्य के बेहतर जीवनयापन और जीवन में आनेवाली समस्याओं को हल करने की ताकत शिक्षा देती हैं। शिक्षा मनुष्य को संस्कारित करने के साथ-साथ उनके कलागुणों को निखारती है, आज प्रतियोगिताओं के युग में हमें अधिक कुशल बनाने में सहायक है और सतत प्रगतिपथ पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करके पथ प्रदर्शित करती हैं। मनुष्य ऐसी ही शिक्षा की कल्पना अपने जीवन के लिए करता है, जो उसके जीवन को सफल और सार्थक कर दें। शिक्षा पर हर एक मनुष्य का समान हक है और दुनिया में प्रत्येक को शिक्षा का यह अधिकार मिलना ही चाहिए ताकि वह अपना जीवन को बेहतर बना सकें, शिक्षा का भी यही उद्देश्य होता हैं। दुनिया में जिन देशों ने शिक्षा की गुणवत्ता और महत्व को समझा है, आज वह देश संपन्न राष्ट्रों में गिने जाते है, छोटे – छोटे देश भी शिक्षा की गुणवत्ता के बलबूते पर विकसित और प्रबल बन चुके हैं। यूनेस्को ने अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस 2026 की आधिकारिक थीम है “शिक्षा को मिलकर बनाने में युवाओं की शक्ति” घोषित की हैं।

देश में नई शिक्षा प्रणाली और कौशल विकास पर जोर दिया जा रहा है, ताकि युवाओं के सपनों को ऊंची उड़ान मिल सकें। फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, वर्तमान कार्यबल के लगभग 39 प्रतिशत के कौशल साल 2030 तक अप्रचलित अर्थात पुराने हो जाने की प्रबल संभावना हैं। इंडिया स्किल्स रिपोर्ट 2025 के मुताबिक, सिर्फ़ 54.8 प्रतिशत भारतीय युवा ही नौकरी के काबिल माने जाते हैं, और कई लोगों में कार्यस्थल पर सफल होने के लिए आवश्यक डिजिटल दक्षता, अनुकूलनक्षमता और सॉफ्ट स्किल्स की कमी हैं।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो डेटा के मुताबिक, 2022 में भारत में गिरफ्तार हुए सभी नाबालिगों में से लगभग आधे 49.5 प्रतिशत हिंसक अपराधों में शामिल थे, यह 2016 के 32.5 प्रतिशत के मुकाबले बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी है। राष्ट्रीय बाल अपराध दर 2022 में प्रति लाख बच्चों पर 6.9 से थोड़ा बढ़कर 2023 में 7.1 हो गया। दिल्ली में बच्चों में सबसे ज़्यादा अपराध दर, प्रति लाख बच्चों की आबादी पर 41.1 दर्ज किया गया, जो राष्ट्रीय औसत से बहुत ज़्यादा हैं। मानसिक तनाव की समस्या तेजी से बढ़ी है, देश के युवाओं में यह समस्या लगातार बढ़ रही है, बढ़ते तनाव, चिंता और अवसाद के साथ-साथ आसानी से मिलने वाले मानसिक सहयोग की कमी और लगातार सोशल स्टिग्मा की वजह से युवा मानसिक स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहे हैं। साल 2020-22 में, भारत में 15-29 साल के लोगों में आत्महत्या की वजह से 60,700 से ज़्यादा मौतें हुईं, जो दुनिया में सबसे ज़्यादा हैं। शिक्षित युवाओं में बेरोज़गारी बढ़ रही है क्योंकि पढ़ाई और नौकरी मार्केट की ज़रूरतों के बीच कौशल का मेल नहीं है, जबकि कई लोग कम फ़ायदों वाली, छोटे पद या जोखीमभरी नौकरियों में काम करने को मजबूर हैं। आज भी किसी सरकारी दफ्तर में चपरासी के पद के लिए पदभर्ती के विज्ञापन आने पर हजारो उच्च शिक्षित युवा उस चपरासी के पद के लिए आवेदन करते हैं। दोस्तों के दबाव और तनाव या मौजमस्ती के कारण युवाओं के नशे की लत के जाल में फंसने की संभावना बहुत अधिक बढ़ रही है और उनके उपचार, पुनर्वसन, साधनसंपन्न सुविधा केंद्रों की कमी इस समस्या को अधिक खराब कर रही हैं।

कैग रिपोर्ट 2025 अनुसार, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में भारी गड़बड़िया मिली है, इस योजना के अंतर्गत 56.14 लाख युवाओं को ट्रेनिंग दी गई, उसमे से केवल 23.18 लाख युवाओं को रोजगार मिला, जबकि 32.96 लाख युवा अर्थात 58.71 प्रतिशत युवा कौशल विकास योजना का लाभ लेकर भी बेरोजगार ही रह गए हैं। इसमें 13.33 प्रतिशत युवा उम्मीदवार कौशल के लिए आवश्यक न्यूनतम योग्यता भी पूरी नहीं कर पा रहे थे। 94.53 प्रतिशत मामलों में बैंक अकाउंट डिटेल्स खाली थी, 94 प्रतिशत से ज्यादा बैंक खातों की वैध जानकारी नहीं थी, इस कारण 34 लाख युवाओं को 500 रुपये का रिवॉर्ड भी नहीं मिला। इस योजना में एक ही स्थान के प्रशिक्षण के फोटो का इस्तेमाल अनेक राज्यों में हो रहा था, अनेक ट्रेनिंग सेंटर असल में बंद थे, लेकिन सेंटर कागजों पर चल रहे थे। अधिकतम युवा उम्मीदवारों की ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर भी फेक दिए गए थे। इस योजना के अंतर्गत 2015 से 2024 के बीच कुल 9261 करोड़ रुपया खर्च किया गया है, लक्ष्य 1.32 करोड़ युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण देना था और 1.1 को प्रशिक्षण प्रमाणपत्र भी प्राप्त हुआ कागजों पर, लेकिन कैग ने इसे आंकड़ों का खेल बताया।

देश में लगातार बढ़ती आर्थिक विषमता समाज में एक बड़ी खाई का निर्माण कर रही है, इससे विकास कार्य में बाधाएं उत्पन्न होती हैं। विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक सर्वेक्षण रिपोर्ट यूथ पल्स 2026 : बदलती दुनिया के लिए अगली पीढ़ी की सोच के निष्कर्ष अनुसार, 48.2 प्रतिशत ने बढ़ती आर्थिक विषमता को सबसे बड़ा संकट बताया हैं। इस सर्वेक्षण में 144 देश शामिल हुए। 57 प्रतिशत युवाओं ने वित्तीय चिंताओं को तनाव का प्रमुख कारण बताया हैं। 57.2 प्रतिशत युवाओं ने रोजगार निर्माण या उपलब्धता को प्राथमिकता दी है, जबकि 46.1 प्रतिशत युवाओं ने सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता को जरुरत माना हैं।

देश में बेरोजगारी का आलम तो हम सभी जानते ही है, लेकिन दशकों तक रिक्त पदों पर नई भर्ती न करना व्यवस्था या कार्यप्रणाली को कमजोर बना देती हैं। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र राज्य के राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में स्वीकृत प्रोफेसर पद 258 है, इसमें से वर्तमान में कार्यरत केवल 86 है, बाकि 66 प्रतिशत पद खाली पड़े हुए है, जिसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता हैं। यह सिर्फ एक विश्वविद्यालय की ही नहीं, अपितु संपूर्ण महाराष्ट्र राज्य में यही परिस्थिति है, देश के कुछ अन्य राज्यों के हालात भी कुछ अलग नहीं हैं। कई राज्यों में शिक्षा विभाग की स्थिति काफी भयावह हैं। कई राज्यों में शिक्षा विभाग के घोटाले अक्सर सुनाई देते है, भ्रष्टाचार, परीक्षा पर्चा लिक, जाली दस्तावेज, नकली भर्ती, परीक्षा में डमी परीक्षार्थी, नकली पदवी खरीद मामला जैसे अनेक मामले दिनोंदिन उजागर होते रहते हैं। इन सब के कारण शिक्षा जैसे पवित्र पेशे को कालिख पोत दी जाती है, और नुकसान देश के वर्तमान व आनेवाली पीढ़ी को भुगतना पड़ता हैं।

देश के निजी शिक्षा संस्थान और अनेक राज्यों के सरकारी विद्यालयों, संस्थानों के बिच बहुत बड़ा अंतर है, जो समय के साथ तेजी से बढ़ता ही जा रहा हैं। पिछले दशक (लगभग 2014-2024) में भारत में लगभग 90,000 सरकारी स्कूल बंद हो चुके है और इस दौरान भारत में प्राइवेट स्कूलों की संख्या में लगभग 42,944 की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, ऐसा सरकारी आंकड़े और यूनेस्को की रिपोर्ट बताती हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और योग्यतानुसार रोजगार या व्यवसाय उपलब्धता ये तीन बाते मनुष्य को सहज उपलब्ध होनी चाहिए। इसमें कभी भी भेदभाव या आर्थिक विषमता रूकावट नहीं होनी चाहिए। देखा जाए तो देश का पूरा भविष्य उस देश की शिक्षा निति और उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करती हैं। अच्छी शिक्षा समाज और देश के प्रत्येक क्षेत्र में काबिल और जिम्मेदार कर्तृत्वशैली युक्त प्रभावी युवा शक्ति का निर्माण करती हैं। शिक्षा से संस्कार, ज्ञान, कौशल और सुजान नागरिक बनकर व्यक्ति देश और विश्व में पथप्रदर्शित करते हैं। विकसित देशों का उदाहरण हमारे सामने है, ओलंपिक जैसे विश्व स्तरीय खेलों में छोटे – छोटे देश पदक तालिका में ऊपर होते हैं। जो देश उन्नत हुए, वे अपने मजबूत और कौशल्यपूर्ण शिक्षा प्रणाली के बलबूते पर। आनेवाला कल भी उसी देश का उज्जवल होगा, जो शिक्षा के गुणवत्ता को समझेगा।

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