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    ईरान विद्राेह: धमकियों के साये में कूटनीति और मानवाधिकार

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी का असर. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकी का असर.
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    अजय तिवारी, संपादक

    ईरान में जारी मौजूदा संकट अंतरराष्ट्रीय राजनीति में ‘शक्ति प्रदर्शन’ और ‘मानवीय मूल्यों’ के बीच छिड़े संघर्ष का जीता-जागता उदाहरण है। एक तरफ ईरान की दमनकारी सत्ता अपने अस्तित्व को बचाने के लिए प्रदर्शनकारियों को सरेआम फांसी देने जैसे क्रूर हथकंडे अपना रही है, तो दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रम्प की सीधी और आक्रामक चेतावनी ने तेहरान को रक्षात्मक होने पर मजबूर कर दिया है। यह पहली बार है जब किसी विदेशी राष्ट्र की सैन्य और आर्थिक धमकी ने ईरान के आंतरिक न्यायिक फैसलों को इतनी तेजी से प्रभावित किया है। हालाँकि, फांसी टलना एक तात्कालिक राहत है, लेकिन ईरान के भीतर मारे गए हजारों प्रदर्शनकारियों (जिनकी संख्या 12,000 तक बताई जा रही है) का आंकड़ा यह साबित करता है कि वहां मानवाधिकारों का पूरी तरह गला घोंट दिया गया है।

    भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती वाली है। एक ओर उसे ईरान में फंसे अपने 10,000 नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करनी है, तो दूसरी ओर उसे मध्य-पूर्व के इस बिगड़ते समीकरण में अपने रणनीतिक हितों को भी बचाना है। ईरान द्वारा अपने हवाई क्षेत्र को अचानक बंद करना और अमेरिकी ठिकानों पर हमले की धमकी देना यह दर्शाता है कि संघर्ष कभी भी पूर्ण युद्ध में तब्दील हो सकता है। अंततः, रजा पहलवी जैसे विपक्षी नेताओं को ट्रम्प का खुला समर्थन देना यह संकेत है कि वॉशिंगटन अब ईरान में ‘शासन परिवर्तन’ (Regime Change) की दिशा में बढ़ रहा है। यदि कूटनीतिक रास्ते जल्द नहीं तलाशे गए, तो यह क्षेत्र एक ऐसे विनाश की ओर बढ़ेगा जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति पर लंबे समय तक रहेगा।

    खबर यह है…

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    वॉशिंगटन/तेहरान: BDC News

    अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कड़ी चेतावनी के बाद ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों को फांसी देने के अपने फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि फिलहाल किसी को फांसी देने की कोई योजना नहीं है। यह बयान उस समय आया है जब ईरान में गृहयुद्ध जैसे हालात बने हुए हैं और राष्ट्रपति ट्रम्प ने धमकी दी थी कि यदि प्रदर्शनकारियों की हत्याएं नहीं रुकीं, तो ईरान को “कुछ भयानक” परिणाम भुगतने होंगे।

    फांसी का फैसला टला, पर तनाव बरकरार

    ईरान सरकार ने हाल ही में 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी इरफान सुलतानी को सरेआम फांसी देने की तैयारी कर ली थी। उन पर ‘ईश्वर के खिलाफ युद्ध’ (मोहरेबेह) छेड़ने का आरोप लगाया गया था। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि सुलतानी को न तो वकील दिया गया और न ही अपील का मौका। ट्रम्प के हस्तक्षेप के बाद सुलतानी की फांसी टल गई है, लेकिन ईरान के न्यायपालिका प्रमुख अभी भी ‘फास्ट ट्रैक ट्रायल’ और जल्द सजा देने की वकालत कर रहे हैं। वहीं, ईरान के सरकारी टीवी पर ट्रम्प को जान से मारने की सीधी धमकी भी दी गई है, जिससे विवाद और गहरा गया है।

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