‘ऑपरेशन सिंदूर’ से आतंक के ढांचे को तोड़ा, भविष्य में दुस्साहस किया तो मिलेगा करारा जवाब: आर्मी चीफ

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नई दिल्ली: BDC News
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को अपनी वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तान को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमा पार पाकिस्तान की ओर से किए जाने वाले किसी भी दुस्साहस का भविष्य में और भी घातक जवाब दिया जाएगा। जनरल द्विवेदी ने खुलासा किया कि वर्तमान में सीमा पार 8 आतंकवादी कैंप सक्रिय हैं, जिनमें से 6 नियंत्रण रेखा (LoC) और 2 अंतरराष्ट्रीय सीमा के सामने स्थित हैं। भारतीय सेना इन गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए है और किसी भी उकसावे की स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार है।

ऑपरेशन सिंदूर: 88 घंटों में तोड़ी आतंक की कमर

पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकी हमले का जिक्र करते हुए सेना प्रमुख ने बताया कि कैसे भारत ने निर्णायक जवाबी कार्रवाई की। उन्होंने कहा कि 7 मई 2025 को शुरू हुआ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ आतंकवाद के ढांचे पर एक सटीक प्रहार था। कार्रवाई के शुरुआती 22 मिनट और उसके बाद के 88 घंटों में भारतीय सेना ने पाकिस्तान की परमाणु धमकियों के खोखलेपन को उजागर करते हुए 9 में से 7 प्रमुख आतंकी ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया। सेना प्रमुख के अनुसार, इस ऑपरेशन ने भारत की रणनीतिक स्पष्टता और युद्धक क्षमता को वैश्विक स्तर पर सिद्ध किया है।

आतंकवाद की जगह पर्यटन का बोलबाला

घाटी की स्थिति पर संतोष व्यक्त करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अब सकारात्मक बदलाव दिख रहा है। वर्ष 2025 में कुल 31 आतंकवादी मारे गए, जिनमें से 65% पाकिस्तानी मूल के थे। उन्होंने जानकारी दी कि स्थानीय आतंकवादियों की भर्ती अब लगभग शून्य हो गई है और सक्रिय स्थानीय आतंकियों की संख्या ‘सिंगल डिजिट’ में सिमट गई है। सुरक्षा के बेहतर माहौल के कारण पर्यटन में भारी उछाल आया है और अमरनाथ यात्रा में रिकॉर्ड 4 लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल हुए, जो पिछले पांच वर्षों के औसत से काफी अधिक है।

चीन और म्यांमार सीमा पर रणनीतिक सतर्कता

उत्तरी सीमा (LAC) का उल्लेख करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन सेना पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने शक्सगाम घाटी में चीन की गतिविधियों और पाकिस्तान के साथ 1963 के समझौते को पूरी तरह अवैध करार दिया। इसके साथ ही म्यांमार सीमा पर अस्थिरता से निपटने के लिए असम राइफल्स और गृह मंत्रालय के साथ मिलकर एक ‘मल्टी-एजेंसी ग्रिड’ काम कर रहा है। जनरल द्विवेदी ने भविष्य की चुनौतियों के लिए ‘मिसाइल और रॉकेट फोर्स’ तैयार करने की योजना पर भी बल दिया, जो आधुनिक युद्ध के लिए सेना को और अधिक सक्षम बनाएगी।

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