Headlines

    आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: सड़कों को कुत्तों से साफ करें

    आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: सड़कों को कुत्तों से साफ करें
    👁️ 110 Views

    नई दिल्ली |BDC News

    आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त:

    आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: देश की सड़कों पर आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और उनसे होने वाली सड़क दुर्घटनाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा अब केवल पशु प्रेम का नहीं, बल्कि सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा और मानव जीवन से जुड़ा हुआ है।

    कपिल सिब्बल को फटकार: ‘आपकी जानकारी पुरानी है’

    सुनवाई के दौरान जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने यह दलील दी कि कुत्ते सड़कों पर नहीं बल्कि निजी परिसरों में पाए जाते हैं, तो शीर्ष अदालत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। पीठ ने पूछा, “क्या आप गंभीर हैं? ऐसा लगता है कि आपकी जानकारी पुरानी हो चुकी है।” कोर्ट ने जोर देकर कहा कि सड़कों, स्कूलों और संस्थानों में कुत्तों की मौजूदगी की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि ये न केवल राहगीरों को काटते हैं बल्कि वाहनों का पीछा कर घातक दुर्घटनाओं का कारण भी बनते हैं।

    ‘अब बस कुत्तों की काउंसलिंग बाकी रह गई है’

    जब सिब्बल ने कुत्तों को पकड़ने, नसबंदी करने और फिर उसी इलाके में छोड़ने (CSVR मॉडल) की प्रक्रिया का बचाव किया, तो कोर्ट ने व्यंग्यात्मक लहजे में टिप्पणी की। अदालत ने कहा, “अब बस कुत्तों को काउंसलिंग देना ही बाकी रह गया है, ताकि वे दोबारा सड़क पर छोड़े जाने के बाद लोगों को न काटें।” कोर्ट ने दो टूक कहा कि ‘इलाज से बेहतर रोकथाम है’ (Prevention is better than cure) और यह अनुमान लगाना असंभव है कि जानवर कब हिंसक हो जाए।

    बाघ बनाम कुत्ता: सिब्बल का तर्क और SG मेहता का पलटवार

    डॉग लवर्स की ओर से पक्ष रखते हुए सिब्बल ने तर्क दिया, “अगर एक बाघ आदमखोर हो जाता है, तो हम पूरे जंगल के बाघों को नहीं मारते। समाधान हत्या नहीं, बल्कि वैज्ञानिक नसबंदी और टीकाकरण है।” उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए CSVR मॉडल की वकालत की।

    वहीं, सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने गेटेड सोसायटियों और RWA के अधिकारों पर सवाल उठाए। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “हम सभी जानवर प्रेमी हैं, लेकिन हमें इंसान प्रेमी भी होना चाहिए। अगर कोई ताज़ा दूध पीने के लिए सोसाइटी में भैंस पालना चाहेगा, तो क्या इसकी अनुमति दी जा सकती है? इससे दूसरों को होने वाली परेशानी का ध्यान रखना होगा।”

    राज्यों की लापरवाही पर नाराजगी

    अदालत को सूचित किया गया कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन पर पिछले आदेशों के अनुपालन की रिपोर्ट अभी तक दाखिल नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट की इन टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में आवारा कुत्तों के प्रबंधन और सार्वजनिक स्थलों से उन्हें हटाने को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

    यह भी पढ़ें

    MP Weather Live Update: कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चपेट में मध्य प्रदेश, अगले 48 घंटे भारी

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *